उत्तरकाशी में पर्वतारोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आए सिद्धार्थ खंडूड़ी का शव नेस्विला रोड स्थित उनके आवास पर एंबुलेंस से जैसे ही पहुंचा, परिजनों में चीख पुकार मच गई। इस दौरान सिद्धार्थ के पड़ोसियों की भी आंखें नम थीं।
हिमस्खलन में जान गंवाने वाले सिद्धार्थ का शव देेर रात साढ़े आठ बजे उनके घर पहुंचा और शव के उनके योगा केंद्र में रखा गया। सिद्धार्थ का शव देखकर उनकी मां, दादी और जुड़वां बहनें चीत्कार मारने लगीं। उनकी मां और दादी रोते-रोते बेसुध हो गईं। सिद्धार्थ के चचेरे भाई ने बताया कि शुरू से ही पर्वतारोहण और बॉक्सिंग का शौक उनमें था।
उन्होंने दून के सेंट जोसेफ स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की थी। 2015 में स्कूल से पास होने के बाद विदेशी भाषा की पढ़ाई करने के लिए दून विवि में प्रवेश लिया और फ्रांसीसी भाषा में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने घर पर योग केंद्र खोला और लोगों को योग शिक्षा देने लगे।
बताया कि पर्वतारोहण में रुचि के चलते कई बार पहले भी पर्वतारोहण के लिए जा चुके थे। अबकी जाने की कोई योजना नहीं थी, बल्कि 2024 में जाना था, लेकिन विदेश जाने के चक्कर में पर्वतारोहण पर चले गए। बताया कि उनका इरादा था कि पर्वतारोहण के बाद विदेश जाएंगे, लेकिन नियत को कुछ और ही मंजूर था।