घाठेवाली देवी के बाद पड़ा था डाटकाली नाम
मां डाट काली का नाम पहले घाठेवाली देवी हुआ करता था। महंत रमन गोस्वामी ने बताया कि मंदिर की स्थापना के बाद ही मां घाठेवाली का नाम डाटकाली पडा था। दरअसल, गांवो में सुरंग को डाट कहा जाता है। उस समय मंदिर की स्थापना भी सुरंग के पास हुई थी। इसलिए मां का नाम डाट काली पड़ गया।
101 साल से लगातार जल रही अखंड ज्योति
मंदिर में करीब 101 साल से लगातार अखंड ज्योति जल रही है। मंदिर में मां डाट काली के साथ ही हनुमान, गणेश सहित अन्य भगवानों की प्रतिमा भी स्थापित हैं। भक्त मां के दर्शन के बाद भगवान के दर्शन करते हैं।
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मां भद्रकाली के दर्शन के बाद ही पूर्ण होती है यात्रा
मां डाट काली के दर्शन के बाद उनकी बहन मां भद्रकाली के दर्शन किए जाते हैं। उनके दर्शन के बाद ही भक्तों की यात्रा पूर्ण मानी जाती है। मां भद्रकाली का मंदिर भी मां डाट काली मंदिर के पास स्थित टनल से सौ मीटर आगे ही स्थापित है।