सिडकुल में हुए करोड़ों के घोटाले में दोषी मानते हुए डीजीएम (टेक्निकल) संजय रावत को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सिडकुल की एमडी सौजन्या ने की। रावत के निलंबन आदेश में पद पर रहते हुए तकनीकी एवं वित्तीय अनियमितताएं बरतने समेत अन्य वजह बताई गई हैं। निलंबित अफसर को उद्योग निदेशालय से संबद्ध किया गया है।
गौरतलब है कि दिसंबर में ‘अमर उजाला’ ने सितारगंज और काशीपुर एस्कॉर्ट फॉर्म विकसित किए जाने के नाम पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में अरबों रुपये लुटाने का खुलासा किया था। इस पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश मुख्य सचिव को दिए थे। जांच में कई खामियां उजागर हुईं थीं। पता चला कि करोड़ों रुपये खर्चने के बाद भी धरातल पर कोई काम ही नहीं हुआ। इसके अलावा सिडकुल के अफसरों ने कार्य की गुणवत्ता जांचे बिना भुगतान भी कर दिया। वहीं यूपीआरएनएन को ही मिलीभगत के चलते ज्यादातर कार्य आवंटित किए गए।
उद्योगों के लिए काम करने वाली इस संस्था ने पंतनगर में बच्चों के लिए पार्क बनाने के नाम पर सौ करोड़ रुपये लुटा दिए। ऐसी तमाम अनियमितताएं सामने आने के बाद सीएम ने मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए, मगर महीनों तक कुछ नहीं हुआ। घपले की बात पुख्ता होने के बावजूद कार्रवाई न होने की बात ‘अमर उजाला’ ने शुक्रवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की। मुख्यमंत्री ने भी अतिशीघ्र कार्रवाई की बात कही। इसके बाद से ही विभाग में खलबली मच गई।
शाम तक तत्कालीन डीजीएम (टेक्निकल) संजय रावत के निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। आदेश में पद पर रहते हुए तकनीकी एवं वित्तीय अनियमितताएं करने, विकास कार्यों के इस्टीमेट (आगणन) की बिना उचित जांच-पड़ताल किए उच्चाधिकारियों से प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति कराने को मुख्य वजह बताया गया। इसके अलावा इसमें अनावश्यक वृद्धि करवाना, स्वीकृति पत्र की शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित न करना और कार्यदायी संस्था के साथ किए गए समझौता ज्ञापन की शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित न करना, उनके निलंबन के पीछे वजह बताई गई है।
फर्मों के खिलाफ भी होगी सख्ती
सिडकुल घपले में विभागीय कार्रवाई के बाद अब इसमें शामिल कार्यदायी संस्थाओं के अलावा संबंधित फर्मों द्वारा किए गए कामों का थर्ड पार्टी निरीक्षण किया जाना है। उसमें यह साफ होने की उम्मीद है कि आखिर काम किस गुणवत्ता का किया गया है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि जो काम किया गया है, वह करना भी था या किसी और कार्य की जगह यह कर दिया गया।
मैंने शुरू में ही स्पष्ट कर दिया था कि सरकार जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी पर काम करती है। जांच-पड़ताल में थोड़ा वक्त लग सकता है, परंतु दोषियों को दंड हर हाल में दिया जाएगा। सिडकुल घपले के अन्य दोषियों को भी छोड़ा नहीं जाएगा, फिर चाहें कार्यदायी संस्थाएं हों या फिर काम करने वाली फर्में।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री (उत्तराखंड)