पक्षी प्रेमियों के लिए एक सुखद खबर...। जिन साइबेरियन ब्लू और रूबी थ्रोट ने देश के पहले वेटलैंड कंजरवेशन रिजर्व (आसन बैराज झील) से दूरियां बना लीं थी। वह पक्षी करीब तीन साल बाद आसन के घरौंदे में चहचहाते हुए नजर आए हैं। इससे पक्षी प्रेमी खासा उत्साहित हैं।
13-16 सेमी छोटी यह चिड़िया यूरोप, अलास्का और एशिया के देशों में भोज वृक्ष और दलदली झाड़ियों में ब्रीडिंग करती है। लेकिन, सर्दियां शुरू होते ही यह प्रवास के लिए अफ्रीका और भारतीय उपमहाद्वीप के देशों का रुख करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तीन साल पूर्व तक पक्षी नियमित रूप से आसन झील के ऊपर उड़ान भरते नजर आ आ जाते थे। लेकिन पिछले तीन साल से इन पक्षियों ने झील से दूरियां बना ली थी। जिसका कारण अनुकूल वातावरण न मिल पाना बताया जा रहा था। तीन साल बाद यह दोनों पक्षी आसन झील के ऊपर उड़ान भरते हुए नजर आए हैं जो एक सुखद अहसास है।
रेड लिस्ट में दर्ज हैं दोनों पक्षी
साइबेरियन ब्लू और रुबी थ्रोट पहले बड़ी संख्या में पाए जाते थे। लेकिन, अब अनूकूल वातावरण न मिल पाने के कारण इनकी संख्या में तेजी से कमी आई है। यही कारण है कि इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेच्यूर(यूसीएन) ने इसे साल रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटेंड स्पीसज यानी संकटग्रस्त प्रजातियों की श्रेणी में रखा है।
करीब तीन साल बाद ये पक्षी झील के आसपास चहचहाते हुए देखे गए हैं। इस साल अन्य पक्षियों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में हो सकता है कि आसन झील में इस साल इन पक्षियों को अनुकूल वातावरण मिला हो। इन दोनों पक्षियों को साइबेरिया का नीलकंठ भी कहा जाता है।
- अजय शर्मा, पक्षी विशेषज्ञ