भाजपा के मुखिया अमित शाह की टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले श्याम जाजू उत्तराखंड के पार्टी प्रभारी हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में जाजू भाजपा को फतह दिलाने की रणनीति बनाने में लगे हैं। प्रदेश में 18 मार्च के बाद आए राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ जाजू ने हरीश रावत को सत्ता से बेदखल करने की योजना बनाई, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई।
इसके बाद कांग्रेस के नौ विधायकों को भाजपा में शामिल कराने में भी उनकी अहम भूमिका रही। जाजू अब परिवर्तन यात्रा को कामयाब बनाने में जुटे हैं। प्रदेश की राजनीति, बागी विधायकों को भाजपा में शामिल करने, भाजपा में गुटबाजी की सुगबुगाहट और पाटी द्वारा आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अभी तक चेहरा तय नहीं करने सहित अन्य मुद्दों को लेकर अमर उजाला संवाददाता कृष्णेंदु कुमार ने श्याम जाजू से की लंबी बातचीत....
- मार्च माह में प्रदेश की राजनीति में आए उथल-पुथल के दौरान भाजपा की सरकार न बना पाने का आपको कितना मलाल है?
18 मार्च को विधानसभा में जो कुछ हुआ, उसका भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस के कुछ विधायक जरूरत पर भाजपा के साथ खड़े हो गए थे। मामला बहुमत और अल्पमत का था। सदन में किसके पास बहुमत था यह वित्त विधेयक पर मत विभाजन से साफ हो जाता। इसके बाद जो कुछ हुआ उसको लेकर मैं बहुत ज्यादा नहीं दोहराना चाहता। इतना जरूर है कि विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के नौ विधायकों की सदस्यता जल्दबाजी में खारिज नहीं की होती तो आज प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य दूसरा होता, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। हमें इसका कोई अफसोस नहीं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और भाजपा इनमें पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
- विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा अपना चेहरा क्यों नहीं घोषित कर रही है?
यह समझ में नहीं आ रहा कि प्रदेश में भाजपा के चेहरे को लेकर इतनी चर्चा क्यों हैं? उत्तराखंड में ही 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने तो अपना कोई चेहरा घोषित नहीं किया था। भाजपा ने भी झ्रारखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में चेहरा घोषित नहीं किया। फिर भी इन तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार बनी। जहां तक 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी चेहरे का सवाल है, उचित समय पर भाजपा संसदीय बोर्ड इस पर फैसला लेगा।
-तो क्या हर राज्य के लिए भाजपा के लिए नीति अलग-अलग है?
हर राज्य की राजनीतिक स्थितियों के मुताबिक पार्टी निर्णय लेती है। हर राज्य के लिए अलग-अलग रणनीति का सवाल तो बड़ी बात है, हर विधानसभा क्षेत्र के लिए पार्टी की नीति अलग-अलग होती है। हर राज्य के अपने अलग मुद्दे होते हैं। एक राज्य के समीकरण को दूसरे राज्य से नहीं जोड़ा जा सकता। कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के उदाहरण सबके सामने हैं। हर जगह हमारी रणनीति अलग-अलग रही है।
-पार्टी द्वारा चेहरा घोषित नहीं करने की वजह गुटबाजी तो नहीं?
पार्टी में उतनी गुटबाजी नहीं है, जितनी इसकी चर्चा है। भाजपा कोई व्यक्तिवादी पार्टी नहीं है, इसमें परिवारवाद नहीं है। यहां सिस्टम से काम चलता है, जिसमें गुटबाजी के लिए कोई जगह नहीं। यह जरूर हो सकता है कि कार्यकर्ताओं का किसी खास नेता के प्रति झुकाव हो। यह स्वाभाविक भी है, लेकिन इसका पार्टी पर किसी तरह का कोई असर नहीं है। पार्टी का जो आदेश होता है उसे भाजपा का हर कार्यकर्ता मानता है। यहां अनुशासन को प्राथमिकता दी जाती है।
-रुड़की प्रदेश कार्यसमिति की मीटिंग में कोश्यारी और खंडूड़ी ने जो मुद्दे उठाए थे उससे तो यह जाहिर होता है पार्टी में गुटबाजी है। खंडूड़ी ने तो यहां तक कहा कि विधानसभा का पिछला चुनाव भाजपा गुटबाजी की वजह से हारी?
कोश्यारी और खंडूड़ी ने तो भाजपा को प्रदेश में खड़ा करने का काम किया है। दोनों ही पार्टी के सम्मानित नेता हैं। रुड़की में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की मीटिंग में राजनीतिक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान दोनों ने कुछ मु्द्दे उठाए थे। पार्टी के फोरम पर मुद्दे उठाए भी जाने चाहिए। यह एक स्वस्थ परंपरा है। भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यहां हर कार्यकर्ता को पार्टी फोरम पर अपनी बात कहने का हक है। कोश्यारी और खंडूड़ी ने भी अपनी बात कही थी। पार्टी उनके राजनीतिक अनुभव का विधानसभा चुनावों में लाभ लेगी।
-कांग्रेस के जो दस विधायक भाजपा में आए हैं। क्या पार्टी सभी को टिकट देगी?
हमने किसी को भी सशर्त पार्टी में शामिल नहीं किया है, जो लोग आए हैं बिना शर्त आए हैं। भाजपा में टिकट दिए जाने की एक प्रक्रिया है। पार्टी नेतृत्व जिसको भी उचित समझेगा टिकट देगा। आने वाले दिनों में भी कई अन्य लोग पार्टी मेेें आएंगे, लेकिन इसमें टिकट की शर्त पर किसी को शामिल नहीं किया जाएगा।
-कई राजनीतिक दलों के लोग भाजपा के संपर्क में इसलिए हैं कि उनको विधानसभा चुनावों में टिकट मिल जाए। ऐसे लोगों को आप कैसे रोकेंगे?
देखिए, सबसे पहली बात तो यह कि राजनीतिक लोग संन्यासी तो होते नहीं हैं। संभव है कि पार्टी मेें आने की कोशिश करने वाले या आने वाले की अपनी कोई मंशा हो। पार्टी उसके मन की बात तो नहीं जान सकती। लेकिन मैं यह पहले भी कह चुका हूं कि पार्टी में आने वाले लोग बिना शर्त आ रहे हैं। हमारी यह कोशिश होती है कि पार्टी में आने वाले लोगों पर किसी तरह का दाग ना हो। भाजपा भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करती है।
-कांग्रेस के दस विधायकों को लेकर पार्टी में कई कार्यकर्ता सवाल उठाते रहते हैं। क्या इनके आने से भाजपा को प्रदेश में मजबूती मिली है?
एक सामान्य व्यक्ति भी अगर पार्टी में आता है तो इससे मजबूती मिलती है। कांग्रेस के जो नौ या दस विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं उसमें से कोई पूर्व मुख्यमंत्री था तो कोई कैबिनेट मंत्री। इस तरह की अफवाह कांग्रेस द्वारा फैलाई जाती है कि दस विधायकों को लेकर भाजपा में किसी तरह का विरोध है। अब ये सभी भाजपा के अनुशासित कार्यकर्ता हैं। कांग्रेस अपने विधायकों को तो संभाल नहीं पाई। सही कहें तो हरीश रावत की नीतियों की वजह से ही कांग्रेस में टूट हुई।
-आप पार्टी के रणनीतिकारों में से एक है। आगामी चुनावों में भाजपा हरीश रावत की सरकार को किन मुद्दों पर घेरेगी?
पहली बात तो यह कि हरीश रावत हमारे लिए कोई समस्या नहीं हैं। जनता को उनकी हकीकत के बारे में पता है। सिर्फ राजनीतिक ड्रामा करके वोट नहीं हासिल किया जा सकता। मुख्यमंत्री जहां भी जाते हैं घोषणाएं कर आते हैं। घोषणाओं पर अमल होता नहीं है। मुख्यमंत्री ने तो खुद भाजपा को कई मुद्दे दे दिए हैं, जिसके आधार पर हम उनको घरेंगे। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अपने विवेकाधीन कोष का राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल का मु्ददा भी भाजपा उठाएगी। प्रदेश सरकार की जो विफलताएं हैं, उसको भाजपा जनता के सामने रखेगी। साथ में यह भी बताएंगे कि केंद्र सरकार की पिछले ढाई साल की उपलब्धियां क्या रही हैं?