बदरीनाथ के तीर्थ पुरोहितों को आपदा के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। धाम में देवप्रयाग के करीब दो सौ तीर्थ पुरोहित यात्रा के दौरान छह माह तक रहते हैं।
इस बार 16/17 जून की जलप्रलय से बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा ठप पड़ने से तीर्थ पुरोहितों के सम्मुख आजीविका का संकट खड़ा हो गया। कई पुरोहितों ने धाम में रहते हुए बिजली और पानी के कनेक्शन कटवा दिए हैं। वे अब अंधेरे में रात गुजार कर सार्वजनिक स्टेंड पोस्टों से पानी की सप्लाई कर रहे हैं।
यूं तो तीर्थयात्रा के दौरान तीर्थ पुरोहित धाम में अपने यजमानों की पूजा-अर्चना करते हैं। इस बार यात्रा बाधित रहने से उन्हें आर्थिक क्षति हुई है।
तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि धाम में उनका भी नुकसान हुआ है, लेकिन प्रशासन उन्हें मुआवजा देने में हीलाहवाली कर रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी होटल, ढाबों, लॉज और सराय की क्षति का मुआवजा नहीं दिया गया।
केस-एक-
16/17 जून को बदरीनाथ में तीर्थ पुरोहित देवप्रयाग निवासी बिजेंद्र टोडरिया के 10 कमरों का आवासीय भवन ऋषि गंगा के तेज बहाव से ध्वस्त हो गया था। उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया। जब वे तहसील जोशीमठ में मुआवजे के लिए गए तो उन्हें यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, कि उनका एक आवासीय भवन देवप्रयाग में भी है। अब बिजेंद्र मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहा है।
केस-दो-
तीर्थ पुरोहित इठ्ठन लाल ने जलप्रलय के बाद बिजली-पानी के कनेक्शन कटवा लिए हैं। उनकी तरह कई और लोगों ने भी बिजली-पानी के कनेक्शन विच्छेदित करवा लिए हैं। उनका कहना है कि आपदा को देखते हुए जल प्रलय के दौरान खर्च की गई बिजली- पानी का बिल माफ किया जाना चाहिए। अब तीर्थयात्रा अंतिम चरण में है, जिसे देखते हुए बिजली, पानी के कनेक्शन कटवा दिए हैं।