राम भक्ति प्रचार समिति देवथला की ओर से प्राचीन शिव मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन वृंदावन से पधारे कथा व्यास गौतम कृष्ण ने प्रभु श्री राम के वन गमन और निषाद राज मिलन का प्रसंग सुनाया।
कहा कि सृष्टि के तारण हार को केवट नदी पार कराते हैं, और प्रभु के चरण पखार करके समस्त वासियों को भव सागर पार लगाने की विनती करते हैं। केवट कहते हैं कि प्रभु आज आप मेरे द्वार आए हैं, मैं आपको सरयू पार लगा रहा हूं। जब मैं आपके द्वार आऊं तो आप मुझे भव सागर पार लगा देना।
उन्होंने कहा कि यह प्रसंग सम भाव का संदेश संसार को देता हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु राम के चरित्र को सभी को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। प्रभु राम ही भाव सागर से पार लगाने वाले हैं। रामकथा के श्रवण मात्र से पूर्व जन्म के पाप धुल जाते हैं। उन्होंने पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव का चिंता जताई।
लोगों से सनातनी संस्कृति को अपनाने का आह्वान किया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष राजपाल, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय किशोर, सभासद शम्मी प्रकाश, ज्येष्ठ उपप्रमुख प्रवीण बंसल आदि मौजूद रहे।