पूर्व उत्तराखंड सरकार में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में नई तहसीलों और उप तहसीलों का गठन तो कर दिया गया, मगर स्टॉफ की तैनाती के बिना ये सभी प्रशासनिक इकाइयां वीरान हैं।
तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया जिस सुस्त गति से चल रही है, उससे लगता नहीं कि जल्द तहसीलों व उप तहसीलों में कामकाज सामान्य हो पाएगा। प्रदेश में 110 तहसीलें और 18 उप तहसीलें बनाई जा चुकी हैं।
मगर स्टॉफ के नाम पर गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़कर पांच नियमित तहसीलदार तक नहीं है। राजस्व सेवा में तहसीलदार के 114 पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष 37 पदों पर सीनियर नायब तहसीलदारों की तदर्थ नियुक्ति की गई है। शेष 72 पद अब भी खाली हैं। 37 में से 14 तदर्थ तहसीलदारों मूल भूमिका से जुदा डिप्टी कलेक्टर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
नायब तहसीलदार पद पर और भी बुरा हाल
नायब तहसीलदार के पद पर तो और भी बुरा हाल है। इस पद पर पूरे प्रदेश में सिर्फ चार नियमित नायब तहसीलदार हैं। इस सेवा में 152 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 77 तदर्थ नायब तहसीलदार बनाए गए हैं। ये जिम्मेदारी वरिष्ठ राजस्व निरीक्षक और रजिस्ट्रार कानूनगो निभा रहे हैं। कुल 73 पद रिक्त हैं।
पटवारियों का भी टोटा
राजस्व सेवा में ऊपर से लेकर नीचे तक कार्मिकों को भारी कमी है। विभाग में पटवारी के स्वीकृत 1206 पदों के सापेक्ष 650 पद खाली हैं। लेकिन, अगले साल तक विभाग को पटवारी मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में 490 पटवारी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनके इस साल के अंत का सेवा में आ जाने की संभावना है।
नायब तहसीलदार के 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं। सीधी भर्ती के 45 पदों का अधियाचन लोक सेवा आयोग को भेजा जा चुका है। पदोन्नति कोटे के तहत 55 पदों को लोकसेवा आयोग से भरे जाने की कार्यवाही चल रही है। तहसीलदारों के पद पर तदर्थ तैनाती की गई है।
- एस.एन. पांडेय, आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद
...और दावे हैं नए जिले बनाने के
बड़ी सख्या में नई प्रशासनिक इकाइयों का गठन करने वाली पूर्व सरकार में नए जिलों के गठन को लेकर भी खूब हल्ला रहा। विधानसभा चुनाव में जाने से पहले पिछली सरकार नए जिलों के लिए बाकायदा एक कारप्स फंड भी बना गई। मगर दक्ष स्टॉफ की भीषण कमी से जूझ रही प्रशासनिक इकाइयों की सच्चाई जानने के बावजूद पूर्व सरकार में तहसीलों और उप तहसीलों की घोषणाएं होती रहीं। इन इकाइयों को शामिल करके नए जिलों का गठन होना है। ऐसे जिले बनाने का क्या औचित्य जहां काम करने वाले ही नहीं होंगे?