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...तो खत्म हो जाती शिक्षकों की कमी

Mon, 10 Mar 2014 01:53 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति में मानकों की अनदेखी प्रदेश के सैकड़ों स्कूलों पर भारी पड़ रही है।
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फाइलों से बाहर नहीं निकल सका प्रस्ताव
हालांकि, विभाग ने स्कूलों में अतिरिक्त 1699 शिक्षकों के पद खत्म कर ग्रामीण क्षेत्रों में इतने ही नए पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन यह प्रस्ताव फाइलों से बाहर नहीं निकल सका।

प्रदेश के नगर क्षेत्रों के स्कूलों में छात्रसंख्या तेजी से घटी है। कुछ स्कूलों में 15 से 20 छात्र रह गए हैं। ऐसे में अतिरिक्त पद समाप्त कर सहायक अध्यापकों के इतने ही शिक्षकों की ग्रामीण क्षेत्रों में भर्ती हो सकती है।
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शिक्षा विभाग से मांगी सूचना
मंगल विहार कॉलोनी सुनेहरा रोड रुड़की निवासी पुष्पेंद्र सैनी ने शिक्षा विभाग से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी थी।

जवाब में विभाग ने अपने प्रस्ताव की जानकारी देते हुए बताया कि इससे वित्तीय संसाधनों पर कोई अतिरिक्त व्ययभार नहीं पड़ेगा।

आरटीई के मानकों में अंतर भी कम होगा। केंद्र सरकार से सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत 65 प्रतिशत की सीमा में वित्तीय सहायता भी प्राप्त हो सकेगी।

नगरों में पीपीपी मोड पर स्कूल
विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीपीपी मोड में स्कूल के संचालन की संभावना नगर क्षेत्र में ही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना लागू न करने की बात कही गई है। बताया गया कि इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा है।

जब तक स्कूलों को पीपीपी मोड में चलाने का अंतिम निर्णय नहीं होता, आरटीई के अनुरूप व्यवस्थाएं करना राज्य सरकार का दायित्व है। नगर और ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों का कैडर अलग-अलग है, इस वजह से प्रस्ताव में दिक्कत आई।
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नगर क्षेत्रों में नई भर्ती नहीं हो रही है। नई नियमावली में बेसिक के शिक्षकों का ब्लॉक कैडर है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां तबादलों से पद भरे जाएंगे।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक बेसिक
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