उत्तराखंड में इंस्पेक्टरों का टोटा है, जबकि दारोगाओं की भरमार होने वाली है। जल्द ही एक इंस्पेक्टर के अधीन 15 दारोगा होंगे, जबकि मानक सिर्फ चार का है।
दारोगाओं को प्रमोशन न मिलने से यह स्थिति बनी है। दारोगाओं के 74 पद घटाकर इंस्पेक्टर में जोड़ने का शासनादेश निरस्त हो चुका है, जबकि निरीक्षकों के नए पद सृजित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
उत्तराखंड में साइबर क्राइम का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। खासतौर से राजधानी दून में पिछले साल के मुकाबले इस साल आईटी एक्ट में दोगुना मुकदमे दर्ज हुए हैं।
मुकदमों की जांच पर मारामारी
उत्तराखंड में अभी इंस्पेक्टरों के 117 पद सृजित हैं, इनके सापेक्ष 818 दारोगा हैं। ऐसे में आईटी एक्ट के मुकदमों की जांच पर मारामारी रहती है।
2011 में तत्कालीन डीजीपी जेएस पांडेय ने निरीक्षकों के पद बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें दारोगा के 74 पद कम कर उन्हें इंस्पेक्टर के पदों में जोड़ने की योजना थी।
शासन से भी इसकी अनुमति मिल गई थी। लेकिन मामला कोर्ट में जाते ही शासन बैकफुट पर आ गया।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में 2012 में यह शासनादेश निरस्त कर दिया गया। इसके बाद से फिर कोई प्रस्ताव नहीं बना है।
जुलाई में होगी रैंकर प्रमोशन परीक्षा
हाल में ही 339 उप निरीक्षकों की सीधी भर्ती और 280 रैंकर को प्रमोशन देने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए जुलाई में परीक्षा प्रस्तावित है।
इसके बाद दारोगाओं की संख्या 1500 पहुंच जाएगी, जबकि निरीक्षक 117 ही रहेंगे। दूसरी ओर, इंस्पेक्टरों की सीधी भर्ती की व्यवस्था नहीं है।
प्रमोशन के आधार पर ही उप निरीक्षक को निरीक्षक बनाया जाएगा। पिछले साल 16 दारोगाओं को प्रोन्नति दी गई थी। जबकि निरीक्षक के कार्यों के पर्यवेक्षण करने वाले पीपीएस अधिकारियों के 135 पद है।
थानों में सीनियर-जूनियर विवाद
थानों में भी सीनियर और जूनियर के मसले पर दारोगाओं में काफी जंग होती है।
सीनियर दारोगा अधीनस्थ रहे सिपाही के दारोगा बन एसओ बन जाने या ट्रेनिंग पाने वाले दारोगा के नीचे काम करने में हिचकिचाहट समझते हैं।
प्रदेश में इंस्पेक्टरों के इतने ही पद सृजित हैं, उसी हिसाब से प्रमोशन दिए जाते हैं। हालांकि अब 26 के करीब थाने और चौकियां अपग्रेड करने का प्रस्ताव है। इसे मंजूरी मिलने के बाद नियतन बढ़ने की उम्मीद हैं। इंटेलीजेंस में जरूर इस साल इंस्पेक्टरों के खाली पदों पर प्रमोशन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सिविल पुलिस में इंस्पेक्टर के ज्यादा पद खाली नहीं है।
- बीएस सिद्धू, डीजीपी