भिलंगना ब्लाक की 186 ग्राम पंचायतों की जनता को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने को एक दशक पहले करोड़ों की लागत से बने 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलेश्वर डाक्टरों के अभाव में रेफर सेंटर बन गया है।
अस्पताल में चिकित्सकों समेत अन्य स्टाफ के 30 पद स्वीकृत है। जिनमें से अधिकांश खाली चल रहे हैं। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से प्रसव पीड़िताओं से लेकर अन्य मरीजों को अन्यंत्र अस्पताल में जाना पड़ रहा है।
भिलंगना की जनता की मांग पर सरकार ने वर्ष 2005 में 30 बेड़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलेश्वर का निर्माण करवाया था। मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए सरकार ने हड्डी, फिजिशियन, बालरोग, दंत सर्जन, रेडियोलोजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित नौ चिकित्सक, नौ स्टाफ नर्स, तीन वार्डवाय समेत 30 पद सृजित किए थे। लेकिन अस्पताल निर्माण के 12 साल बाद भी अधिकांश चिकित्सकों, स्टाफ के पद रिक्त पड़े हैं। चिकित्सक न होने से एक्सरे मशीन, अल्ट्रासाउंड आदि सामग्री कमरों में बंद जंख खा रही है।
वर्तमान में दो संविदा, एक स्थाई चिकित्सक, तीन स्टाफ नर्स और एक वार्डब्वॉय ही तैनात है। अस्पताल में डाक्टर न होने से मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। मरीज दर-दर भटककर ऋषिकेश, देहरादून, श्रीनगर और नई टिहरी का रूख करने को मजबूर बने हुए हैं।
अस्पताल निर्माण को भूमिदान देने वाले ग्रामीण हर्षमणी उनियाल, मायाराम, पंकज, उम्मेद सिंह, विशेश्वर दत्त जोशी, मनोज आदि का कहना है कि ग्रामीणों ने इस उम्मीद के साथ 30 नाली भूमिदान दी थी, कि आने वाले दिनों में उनके गांव ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी। लेकिन सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैए के चलते उम्मीदें पूरी नहीं हो पाई है। उन्होंने जल्द चिकित्सकों की तैनाती न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
चिकित्सकों,अन्य स्टाफ के रिक्त पदों की सूचना स्टाफ बैठकों से लेकर प्रत्येक माह शासन-प्रशासन को भेजी जाती है।नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया शासनस्तर से होती है। उम्मीद है कि जल्द समस्या का समाधान होगा।
- डा. सूर्यनारण, प्रभारी चिकित्साधिकारी बेलेश्वर अस्पताल