स्पेक्स संस्था के दावे के मुताबिक, चारधाम यात्रा मार्गों पर बड़े पैमाने पर मिलावट पाई गई। डॉ. बृजमोहन शर्मा ने बताया कि चारधाम मार्गों पर 47 जगहों से 1186 नमूने लिए गए, जिनमें से 1003 में मिलावट पाई गई। रोली के सभी 22 नमूने सिंथेटिक पाए गए। नमक के 450 नमूनों में से केवल 48 में ही आयोडीन मिला। चायपत्ती के 262 में से 206 में मिलावट मिली। सरसों तेल के सभी सैंपलों में मिलावट और सिरका सिंथेटिक पाया गया। दालों के नमूनों में 68 प्रतिशत तक दालें पुरानी पाई गई।
किसमें कैसे मिलावट
चाय में रंग क्रोमियम डाई व पुरानी चाय, कॉफी में इमली के बीज, इलायची दाना में रानीपाल, शहद में घटिया चीनी, रोली में मैटेलिक रंग, छुआरा पुराना, टोमेटो सॉस में रंग व कद्दू, रोहड़ामिन-बी, चिली सॉस में मैलेचाइट ग्रीन, सिरका में एसिटिक एसिड, हल्दी में मैटेनिल पीला, लाल मिर्च में गेरु, काली मिर्च में तेल रहित काली मिर्च, लोंग में तेल रहित लोंग, गरम मसाले में मिट्टी व लीद, दूध में कास्टर तेल, सोड़ा, चीनी, बोरिक एसिड, बटर ऑयल और पनीर में स्किम्ड दूध, बटर ऑयल, रिफाइंड तेल पाया गया।
देहरादून से बद्रीनाथ और केदारनाथ यात्रा मार्गों पर 26 स्थानों से 616 सैंपल लिए गए। 84 प्रतिशत यानी 517 में मिलावट पाई गई। देहरादून में 85 प्रतिशत, डोईवाला में 81 प्रतिशत, भानियावाला में 60 प्रतिशत, ऋषिकेश में 87 प्रतिशत, ब्यासी में 66 प्रतिशत, कोडियाला में 100 प्रतिशत, देवप्रयाग में 77 प्रतिशत, श्रीनगर में 80 प्रतिशत, श्रीकोट में 88 प्रतिशत, रुद्रप्रयाग में 85 प्रतिशत, तिलवाड़ा में 81 प्रतिशत, गौचर में 73 प्रतिशत, कर्णप्रयाग में 82, नंदप्रयाग में 72, चमोली में 76, पीपलकोटी में 88, जोशीमठ में 88, बद्रीनाथ में 90, माणा में 85, अगस्त्यमुनि में 86, गुप्तकाशी में 82, ऊखीमठ में 78, चोपता में 75, गोपेश्वर में 91 और केदारनाथ में 94 प्रतिशत। गंगोत्री मार्ग पर 12 जगहों से 270 सैंपल लिए गए।
यहां नरेंद्रनगर में 93 प्रतिशत, आगराखाल में 78, चंबा में 75, टिहरी में 86, धरासू में 73, डूंडा में 80, उत्तरकाशी में 85, गंगोरी में 100, भटवाड़ी में 100, गंगनानी में 100, हर्षिल में 94 और गंगोत्री में 90 प्रतिशत सैंपलों में मिलावट पाई गई। इसी प्रकार, यमुनोत्री मार्ग में 200 सैंपल लिए गए। इनमें से 166 में मिलावट पाई गई। राजपुर में 80 प्रतिशत, मसूरी में 83, कैंपटी में 76, नैनबाग में 80, बर्नीगाड़ में 88, नौगांव में 86, बड़कोट में 88, हनुमान चट्टी में 83, यमुनोत्री में 81 प्रतिशत सैंपलों में मिलावट पाई गई।
कोई भी संस्था अगर ऐसे दावे करती है तो यह जांचने वाली बात है। क्या किसी संस्था ने सैंपलिंग की है। अगर की है तो कैसे की है। हमारे पास रिपोर्ट आए तो हम देखेंगे। हमारा विभाग पूरी मुस्तैदी से मिलावट पर लगाम लगाने के लिए जुटा हुआ है। ऐसे किसी भी संस्था के दावे पर मैं कुछ कहना नहीं चाहूंगा।
-नितेश झा, सचिव, खाद्य सुरक्षा आयुक्त