आप भाजपा के बहुत पुराने कार्यकर्ता भले ही हों, लेकिन यदि आपमें अगर ये क्वालिटी नहीं होगी, तो आपको पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलेगी।
बीजेपी के चाणक्य अमित शाह ने फरमान जारी किया है कि अगर कार्यकर्ता में तकनीकी दक्षता नहीं है, तो यह कमी आपको अहम विभाग और प्रकल्पों की जिम्मेदारी से दूर कर सकती है।
हालांकि घोषित तौर पर यह पैमाना तय नहीं हैं, लेकिन भाजपा नए विभाग और प्रकल्पों के लिए पदाधिकारियों को चुनते वक्त इस बात पर खास ध्यान दे रही है। यही कारण है कि अभी तक एक भी विभाग और प्रकल्प का प्रमुख नहीं चुना जा सका है।
भाजपा में मोदी-शाह के युग में विभाग और प्रकल्प पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है। यह बीते जमाने की बात हो गई, जबकि विभाग और प्रकल्प सिर्फ पदाधिकारियों के एडजस्टमेंट का जरिया भर होते थे।
अब भाजपा का हाईकमान विभिन्न विभाग और प्रकल्पों के जरिये संगठन की मजबूती का खाका खींच रहा है। दो दिनी उत्तराखंड प्रवास के दौरान पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अमित शाह को विभाग और प्रकल्पों के काम में खोट नजर आया था।
ये ही वजह विभाग और प्रकल्पों के भंग होने का आधार बनी। भाजपा जल्द से जल्द विभाग और प्रकल्प में प्रमुखों की नियुक्ति करना चाहती है, लेकिन उसकी स्मार्ट चेहरों की तलाश पूरी नहीं हो पा रही है। पार्टी युवा और तजुर्बेकार कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाकर इस काम को करना चाहती है। उर्जावान होने के अलावा दावेदार के तकनीकी तौर पर दक्ष होने को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
ये है विभाग और प्रकल्पों में अंतर
संगठनात्मक तौर पर विभागों की स्थायी और प्रकल्पों की अस्थायी प्रवृत्ति मानी गई है। राज्य में भाजपा के 19 विभाग है, जिनका वजूद स्थायी रखा गया है। यानी वे लगातार चलते रहेंगे। इसके विपरीत, खास उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रकल्प रखे गए हैं। इन्हें प्रोजेक्ट कहा जा सकता है, जिन्हें उद्देश्य पूरा होते ही खत्म कर दिया जाता है। भाजपा के राज्य में 10 प्रकल्प हैं।
पार्टी लगातार नए विचारों के साथ आगे बढ़ रही है। पार्टी के कामकाज में दिन-ब-दिन सोशल मीडिया हो या फिर अन्य तकनीकी माध्यम, सबकी उपयोगिता बढ़ रही है। हम पदाधिकारियों का चयन करते वक्त तकनीकी दक्षता के पहलु पर खास ध्यान दे रहे हैं।
अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा