महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव स्वामी रविंद्र पुरी ने बताया कि अखाड़ा नित्यानंद को अपना महामंडलेश्वर मानता है। जब तक उन्हें कोर्ट से कोई सजा न हो जाए तब तक वे अखाड़े के साथ जुड़े रहेंगे।
उन्हें महामंडलेश्वर नगर में भूमि अवश्य दिलाई जाएगी। दूसरी ओर जूना अखाड़े से निकाले गए रमतापंच गोल्डन बाबा के संबंध में अखाड़े द्वारा बैठाई गई जांच की रिपोर्ट अखाड़े को मिल गई है।
इस रिपोर्ट पर जूना अखाड़े के संरक्षण श्रीमहंत हरि गिरि, सभापति सोहन गिरि, उपाध्यक्ष प्रेम गिरि तथा तथा प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने विचार विमर्श किया। इन चारों की ओर से जारी ब्यान में कहा गया है कि गोल्डन बाबा अपराधिक प्रवृत्ति के संत पाए गए हैं।
उनका असली नाम सुधीर कुमार मक्कड़ है तथा उन पर हरिद्वार और दिल्ली सहित विभिन्न थाना क्षेत्र में 34 मामले चल रहे हैं। इन्हे में दिल्ली के गांधी नगर में अपहरण का मामला बहुत गंभीर है। साथ ही हरिद्वार की संपत्ति फर्जी रूप से बेचने का मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
परिणामस्वरूप उनका निष्कासन रद्द करने का कोई आधार नहीं है। जबकि देवेंद्र पुरी, मनोहर पुरी, शिव ओम पुरी और पूजा गिरि की सफाई अखाड़े अखाड़े द्वारा स्वीकार कर ली गई है। श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि अखाड़े को फर्जी और दोषी बाबाओं से मुक्त करने का अभियान जारी रहेगा।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि अखाड़ों द्वारा अपने बाबाओं पर की गई कार्रवाई का स्वागत करते हैं। गलत छवि वाला कोई धर्माचार्य किसी अखाड़े में नहीं रहना चाहिए। अखाड़ा परिषद स्वयं फर्जी बाबाओं के विरुद्ध कार्रवाई करने में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि महानिर्वाणी अखाड़े के स्वामी नित्यानंद पर अभी कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है, अत: उन्हें महामंडलेश्वर नगर में भूमि आवंटित की जानी चाहिए।