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'अजमेर में चिश्ती की दरगाह के नीचे है शिवलिंग'

Mon, 15 Jun 2015 10:25 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि अजमेर में चिश्ती की दरगाह और ताजमहल के नीचे भी शिवलिंग है।
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मुस्लिम शासन काल में देश के मंदिरों को निशाना बनाया गया। फिर भी साजिश सफल नहीं हुई। इसके बाद एक मुस्लिम ने साईं बाबा की प्रतिमाएं मंदिरों में रखवाने की साजिश रची।

गुरुवार को दोपहर हरिद्वार स्थित कनखल के शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि देश में जब मुस्लिमों का शासन था तो उन्हें मस्जिद बनाने के लिए जमीन की कमी नहीं थी। लेकिन उन्होंने इसके लिए हिंदू मंदिरों को चुना।
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काशी, सोमनाथ, मथुरा और राम जन्मभूमि हर जगह मंदिरों को निशाना बनाया गया। वहां पर मस्जिद घोषित करने की साजिश रची गई।
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तो क्या़ हिंदू मंदिर है ताज महल

इससे पहले लखनऊ से आए हरिशंकर जैन और रंजना ने शंकराचार्य से मुलाकात की। दोनों की ओर से अप्रैल में ताजमहल को लेकर आगरा की सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

हरिशंकर जैन ने कहा कि ताजमहल मकबरा नहीं बल्कि हिंदू मंदिर है। उन्होंने कहा कि इसके कई दरवाजे शाहजहां के काल से भी पहले के हैं। फिर ताजमहल शाहजहां की ओर से निर्मित कराया गया, यह कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज भी ताजमहल के 22 कमरे बंद हैं।

मकबरे में इतने कमरे होने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि ताजमहल में 623 चिन्ह ऐसे हैं जो सिद्ध करते हैं कि यह हिंदू स्थल है। उन्होंने शंकराचार्य से अनुरोध किया कि ताजमहल में बंद पड़े अग्रेश्वर महादेव की मुक्ति के लिए राम जन्मभूमि की तरह देश में जनजागरण चलाया जाना चाहिए।
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