इतिहासकार देवेंद्र ओली का मानना है कि ये शिवलिंग 12-13वीं शताब्दी के चंद वंश के शासनकाल के हो सकते हैं। चंद राजाओं की निर्माण शैली में शिवलिंगों का बहुतायत में प्रयोग होता था। ऐसा माना जा सकता है कि यहां पर चंद शासकों ने भवन निर्माण संबंधित कार्यशाला भी रही हो।
चंद राजा मंदिरों और किलों के निर्माण के लिए शिवलिंग तैयार कराते थे। ओली का कहना है कि इस मामले की वास्तविकता पुरातत्व विभाग इन शिवलिगों के अवलोकन के बाद ही सामने आ सकती है।
शिवभक्त थे चंद शासक
इतिहासकार देवेंद्र ओली के अनुसार इतनी अधिक संख्या में शिवलिंगों के मिलने से स्पष्ट होता है कि चंद शासक शिवभक्त थे। चंद शासन के दौरान ही चंपावत नगर के चारों ओर भगवान शिव के सात श्वरों (मठों) की स्थापना की गई थी। इनमें क्रांतेश्वर, ताड़केश्वर, डिप्टेश्वर, मल्लाडेश्वर, मानेश्वर, हरेश्वर और सप्तेश्वर शामिल हैं।