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गंगा में जहाज डॉल्फिन के लिए खतरा

Wed, 14 Sep 2016 10:16 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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डॉल्फिन - फोटो : wikipedia
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गंगा में जहाज चलने से परिवहन शुल्क भले सस्ता हो जाए लेकिन यह जलीय जंतुओं और खासतौर पर डॉल्फिन की सेहत के लिए मुफीद नहीं है।
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जहाज से निकलने वाली अल्ट्रासोनिक किरणें डॉल्फिन के लिए मुसीबत बन सकती हैं। चीन की ‘यां जी’ नदी में ऐसा हो भी चुका है। जल परिवहन सेवा शुरू होने के बाद इस नदी से डॉल्फिन विलुप्त हो गईं। भारतीय वन्यजीव संस्थान ने जल परिवहन योजना से होने वाली समस्याओं की तरफ इशारा किया है। अब इस बारे में अध्ययन किया जा रहा है।

गंगा में जल परिवहन परियोजना बनने के बाद जलीय जंतुओं को होने वाली दिक्कतों के संबंध में सर्वे रिपोर्ट केंद्र को भेज दी गई है। केंद्र को बताया गया है कि गंगा की धारा में जगह-जगह पानी की कमी और धारा में आया बदलाव जल परिवहन के मुफीद नहीं है।
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इसके साथ ही जहाज चलने से लगातार होने वाला शोर जलीय जंतुओं में उलझन पैदा करेगा। डॉल्फिन अल्ट्रासोनिक साउंड के प्रति अति संवेदनशील होती है। जहाज से निकलने वाली अल्ट्रासाउंड ध्वनि डॉल्फिन को प्रभावित करेगी। यही नहीं जलीय जंतुओं का विकास और संरक्षण भी इससे प्रभावित होगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के निर्देश पर नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा को प्रदूषण मुक्त और अविरल बनाने के साथ-साथ नदी के जलीय जीवन को सहेजने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कमर कुरैशी की अगुवाई में गंगा और ब्रह्मपुत्र में डॉल्फिन के संरक्षण का काम किया जा रहा है। डॉल्फिन के वासस्थलों के संरक्षण और नए वासस्थलों को विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।  

‘जल परिवहन के मद्देनजर अभी और विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। गंगा के जलीय जीवन को सहेजने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं।’
- डॉ. वीबी माथुर (निदेशक, भारतीय वन्य जीव संस्थान)

मुख्य बिंदु
- 05 अक्टूबर 2009 को केंद्र सरकार ने गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय प्राणी घोषित किया था।
- गंगा में इसकी संख्या बढ़ाने के लिए केंद्र ने ‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन’ को ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की तरह ही महत्व दिए जाने की बात कही थी।
- जल स्तर में कमी आने, औद्योगिक  और कृषि रसायनों से नदी के  प्रदूषित होने के कारण इसकी संख्या में तेजी से कमी आई है। डॉल्फिन अब लुप्तप्राय जीवों की श्रेणी में आ गई है।
- मछली पकड़ने वाली जालों में फंसने से भी डॉल्फिन मारी जाती हैं। शिकारियों की नजरें भी इन पर होती हैं।
- आईयूसीएन की ताजा रिपोर्ट के  अनुसार गंगा में 2000 डॉल्फिन बची हैं।
- गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने को लेकर 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। गंगा में मिलने वाली सभी नदियों को भी नमामि गंगे परियोजना में शामिल किया गया है।
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- गंगा के किनारे बसे 118 शहरों से प्रतिदिन निकलने वाले 363.6 करोड़ लीटर अवशिष्ट और 764 उद्योगों के हानिकारक प्रदूषकों के कारण नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना बहुत बड़ी चुनौती है।
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