जितने कूड़ा का निस्तारण, उतना ही भुगतान
नई कंपनी को अब कूड़ा निस्तारण का ही भुगतान होगा। जितना कूड़ा निस्तारित होगा उसके हिसाब से प्रति टन 888 रुपये दिए जाएंगे। जबकि पहले रैमकी को कूड़े की मात्रा के आधार पर 1194 प्रति टन के हिसाब से भुगतान होता था। यही कारण है कि आज प्लांट में कूड़ेे का पहाड़ खड़ा हो गया। कंपनी ने कूड़ा तो ले लिया लेकिन उसका निस्तारण सही से नहीं किया।
कूड़े के पहाड़ का निस्तारण करना सबसे बड़ी चुनौती
एनएसीओएफ कंपनी के लिए शीशमबाड़ा कूड़ा निस्तारण प्लांट का संचालन किसी चुनौती से कम नहीं होगा। नगर निगम और रैमकी कंपनी की लापरवाही भारी पड़ सकती है। सबसे बड़ी चुनौती प्लांट में बने कूड़े और आरडीएफ के ढेर का निस्तारण होगा। यह ढेर इतना अधिक हो चुका है कि इसको निस्तारित करने में कंपनी को नाकों चने चबाने पड़ सकते हैं। इसके अलावा कूड़े से निकलने वाले गंदे पानी की समस्या का हल निकालना और प्लांट से उठने वाली बदबू से आसपास के लोगों को निजात दिलाना भी कंपनी के सामने बड़ी चुनौती होगी।
डोर-टु-डोर कूड़ा उठान पर नहीं हो पाया फैसला
नगर निगम ने शहर के 49 वार्डों में डोर-टु-डोर कूड़ा उठान के लिए भी टेंडर निकाले हैं। इसके लिए तीन कंपनियां सामने आई हैं। निगम ने बुधवार को कंपनियों के दस्तावेज की जांच की लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। आज कूड़ा उठान पर भी फैसला हो जाएगा।
निगरानी के लिए दोबारा होंगे टेंडर
घर-घर कूड़ा उठान और निस्तारण की निगरानी के लिए भी कंपनी का चयन किया जाना है। इसके लिए दो कंपनियों ने टेंडर डाले थे लेकिन एक कंपनी दस्तावेज पूरे नहीं कर पाई। लिहाजा टेंडर रद्द कर दिया गया है। अब इसके लिए भी दोबारा टेंडर होंगे।