प्रश्न- राहुल गांधी ने तो विदेशी मंचों पर जाकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं?
उत्तर- राहुल गांधी औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त हैं। भारत में क्या होना है, ये विदेशी तय नहीं करेंगे। उनके तो वोट भी नहीं है। देश की जनता ही असल डॉक्टर है, उन्हें उसके पास जाना चाहिए।
प्रश्न- लेकिन विपक्ष हर बड़े फैसले पर सवाल उठा रहा है?
उत्तर- यह राजनीति का दुर्भाग्य है। इनकी भी कुछ राज्यों में सरकारें हैं। उनके पास भी खुद को साबित करने का अवसर हैं। वे बताएं कि समाज, राज्य और देश कैसे बदला जा सकता है। सिर्फ आलोचना कर देना काफी नहीं। देश सुरक्षित हाथों में है। राष्ट्रहित में नरेंद्र मोदी को 2024 में दोबारा प्रधानमंत्री बनाना है।
प्रश्न- वह कौन सी बात है, जिसकी वजह से दुनिया भारत की ओर देख रही है?
उत्तर- 260 करोड़ बाजू और 130 करोड़ दिमाग। अमेरिका और चीन से बड़ा वर्क फोर्स। इसके अलावा 50 करोड़ ऐसे लोग जिनके जीरो बैलेंस पर खाते खोल कर उन्हें वित्तीय प्रणाली से जोड़ दिया गया। अर्थशास्त्रियों ने तब आशंका जताई कि बैंक बंद हो जाएंगे। लेकिन आज दुनिया यह देख कर हिल गई है कि 50 करोड़ लोगों के खातों में 21 बिलियन डालर हैं। यदि ये उत्पादक संपत्ति बन गए तो देश की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाई पर होगी।
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प्रश्न- देश के लिए यूसीसी को कितना जरूरी मानते हैं?
उत्तर- कोई परिवार, कोई समाज, राष्ट्र या इकाई अलग-अलग कानून के आधार पर नहीं चल सकती। यूसीसी पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। यदि देश तैयार है तो इसे लागू करना चाहिए। केवल राजनीति या आलोचना के आधार पर इसका विरोध उचित नहीं है।
प्रश्न- लोकसभा चुनाव के दौरान आपकी गढ़वाल सीट से चुनाव लड़ने की अकसर चर्चा होती है?
उत्तर- मेरी चुनाव लड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मेरे लिए राजनीति करिअर नहीं, सेवा है। पार्टी का जो भी आदेश होता है, हम उसका पालन करते हैं।