शारदा और ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने शुक्रवार सुबह पूजा के बाद आषाढ़ अमावस्या पर भक्तों के साथ वीआईपी घाट पर स्नान किया और विश्व कल्याण की कामना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आराध्य देवों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्नान के बाद मठ लौटते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वे अपने मत से कभी हटे नहीं हैं।
दुर्भाग्य का विषय है कि साईं के मंदिरों में साईं की प्रतिमा तो छत का स्पर्श कराते हुए ऊंची बनाई जाती है, जबकि शिव, राम और कृष्ण की छोटी-छोटी मूर्तियां उनके पांव के पास रख दी जाती हैं। यह हमारे आराध्य देवों का अपमान है।