द्वारिका एवं ज्योर्तिमठ शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का हरिद्वार में पहला चातुर्मास होगा। इस दौरान वह दो माह हरिद्वार में रहेंगे और प्रतिदिन उद्घोष प्रस्तुत रखेंगे।
वह चातुर्मास के दिन कड़े उपवास रखेंगे। उन्होंने चातुर्मास को गुरु को समर्पित किया है। उनका कहना है वह अपने गुरुओं की परंपराओं का निर्वहन करेंगे। 15 दिन मार्ष के एक-एक पक्ष को मानकर 15 दिन व 15 रात एक-एक पक्ष को मानकर चातुर्मास किया जाता है।
सोमवार को कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में प्रेसवार्ता करते हुए शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि मंगलवार से गुरु पूर्णिमा के दिन से वह 66वां चातुर्मास शुरू करने जा रहे हैं। श्रावण और भादो में नदियों का पानी स्वच्छ होता है। इस पर प्रार्थना करते हुए निवेदन करें। वहां पर किसी स्थान पर रहकर जनता को धर्म के उपदेश साधना करते हुए पोषण करें।