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उत्तराखंड में गंगा की सहायक नदियों पर भी हो सीवरेज प्रबंधन - सीएम

Sun, 15 Dec 2019 11:33 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • पीएम से हरिद्वार महाकुंभ के कार्यों के लिए वित्तीय सहायता मांगी
  • राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे प्रधानमंत्री
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त्रिवेंद्र सिंह रावत और योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नमामि गंगे परियोजना के तहत उत्तराखंड के उन प्रमुख नगरों मे भी सीवरेज प्रबंधन की योजना को स्वीकृति देने की मांग की, जो गंगा की सहायक नदियों पर स्थित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ठोस अपशिष्ठ का निस्तारण भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए या स्वच्छ भारत मिशन के तहत वायबिलिटी गैप फ ंडिंग को बढ़ाकर 90:10 किया जाए।

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 मुख्यमंत्री ने यह मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में उठाई। उन्होंने प्रधानमंत्री से हरिद्वार महाकुंभ में स्थाई व अस्थाई प्रकृति के कार्यों के लिए वित्तीय सहायता का भी अनुरोध किया। शनिवार को कानपुर में इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी व परिषद के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।

सीएम ने रखा नमामि गंगे के कार्यों का रिपोर्ट कार्ड 

बैठक में सीएम ने नमामि गंगे परियोजना के तहत किए गए कार्यों का रिपोर्ट कार्ड रखा। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत चिन्हित 15 नगरों के लिए स्वीकृत 19 में से 10 योजनाएं पूर्ण हो गई। 135 में 113 नालों को टैप कर लिया गया हैं। इनमें से पांच योजनाएं दिसंबर 2019 तक, दो फ रवरी 2020 तक एक जून 2020 तक और एक और योजना नवंबर 2020 तक पूरी हो जाएगी। गंगा की मुख्यधारा के अतिरिक्त दो अन्य सहायक नदियों रिस्पना व कोसी के तटों पर स्थित नगरों देहरादून और रामनगर के लिए भी दो योजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इन्हें भी नवंबर 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा।
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हरिद्वार में देश का पहले हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल एसटीपी

नवाचार के अंतर्गत हरिद्वार में हाल ही में देश का पहला हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल पर आधारित 14 एमएलडी क्षमता काएसटीपी शुरू हो गया है। गंगा किनारे प्रमुख स्थानों पर 21 स्नान घाट और 21 मोक्ष गृहों का निर्माण हो चुका है।

महाकुंभ के पहले हो जाएंगे नमामि गंगे के काम पूरे

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में 2021 में होने वाले महाकुंभ को देखते हुए नमामि गंगे परियोजना में चिन्हित कार्यों को 2020 में पूरा कर लिया जाएगा। हरिद्वार में 72 घाटों की अत्याधुनिक उपकरणों से सफाई का काम किया जा रहा है। 

सिंचाई में इस्तेमाल में होगा परिशोधित जल


हरिद्वार नगर के जगजीतपुर एसटीपी से निकल रहे 45 एमएलडी परिशोधित जल का पूरा उपयोग कृषि सिंचाई के लिए किया जा रहा है। हरिद्वार, ऋषिकेश व मुनिकीरेती में समस्त उपचारित जल का उपयोग कृषि भूमि की सिंचाई के लिए किया जाएगा। एसटीपी से निकलने वाले स्लज को भी कृषि कार्यों में खाद के रूप में निशुल्क वितरित किया जा रहा है।

निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट टू एनर्जी नीति


निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट टू एनर्जी नीति बनाई गई है। गंगा नदी के तटवर्ती 22 गांवों को चिन्हित कर वहां जैविक कृषि को क्लस्टर एप्रोच के माध्यम से प्रोत्साहित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। प्रथम चरण में जनपद चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग व टिहरी के कुल 42 गांवों में जैविक खेती का कार्य प्रारंभ हो चुका है।
 
फ्लड प्लेन जोनिंग


मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तरकाशी जिले में 10 किमी और हरिद्वार में 50 किमी फ्लड प्लेन जोन की अधिसूचना जारी कर दी है और शेष क्षेत्रों में सर्वेक्षण व अन्य औपचारिकताएं जून 2020 तक पूरी हो जाएगी। गंगा वाटिका व बायो डाइवर्सिटी पार्क विकसित करने व नर्सरियां बनाने पर भी जोर है।

सीवेज प्रबंधन की योजनाएं मांगी


मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा की मुख्यधारा के साथ-साथ सहायक नदियों पर स्थित धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण अन्य नगरों में सीवर लाइन डाली जानी आवश्यक है। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।

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