मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नमामि गंगे परियोजना के तहत उत्तराखंड के उन प्रमुख नगरों मे भी सीवरेज प्रबंधन की योजना को स्वीकृति देने की मांग की, जो गंगा की सहायक नदियों पर स्थित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ठोस अपशिष्ठ का निस्तारण भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए या स्वच्छ भारत मिशन के तहत वायबिलिटी गैप फ ंडिंग को बढ़ाकर 90:10 किया जाए।
हरिद्वार नगर के जगजीतपुर एसटीपी से निकल रहे 45 एमएलडी परिशोधित जल का पूरा उपयोग कृषि सिंचाई के लिए किया जा रहा है। हरिद्वार, ऋषिकेश व मुनिकीरेती में समस्त उपचारित जल का उपयोग कृषि भूमि की सिंचाई के लिए किया जाएगा। एसटीपी से निकलने वाले स्लज को भी कृषि कार्यों में खाद के रूप में निशुल्क वितरित किया जा रहा है।
निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट टू एनर्जी नीति
निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट टू एनर्जी नीति बनाई गई है। गंगा नदी के तटवर्ती 22 गांवों को चिन्हित कर वहां जैविक कृषि को क्लस्टर एप्रोच के माध्यम से प्रोत्साहित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। प्रथम चरण में जनपद चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग व टिहरी के कुल 42 गांवों में जैविक खेती का कार्य प्रारंभ हो चुका है।
फ्लड प्लेन जोनिंग
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तरकाशी जिले में 10 किमी और हरिद्वार में 50 किमी फ्लड प्लेन जोन की अधिसूचना जारी कर दी है और शेष क्षेत्रों में सर्वेक्षण व अन्य औपचारिकताएं जून 2020 तक पूरी हो जाएगी। गंगा वाटिका व बायो डाइवर्सिटी पार्क विकसित करने व नर्सरियां बनाने पर भी जोर है।
सीवेज प्रबंधन की योजनाएं मांगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा की मुख्यधारा के साथ-साथ सहायक नदियों पर स्थित धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण अन्य नगरों में सीवर लाइन डाली जानी आवश्यक है। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।