पीएनबी की शाखा में 1.34 करोड़ रुपये के लोन घोटाले के मुकदमे में पूर्व मैनेजर समेत सात लोगों को सजा सुनाई गई है। सजा सीबीआई विशेष जज शंकर राज की अदालत ने सुनाई है। सीबीआई ने वर्ष 2006 में इस संबंध में आठ मुकदमे दर्ज किए थे। इनमें से पूर्व मैनेजर को पांच साल सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है, जबकि, फर्म के मालिकों को तीन-तीन साल की सजा और 15-15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा है।
सीबीआई के अधिवक्ता अभिषेक अरोड़ा ने बताया कि मामला 2004 का है। पंजाब नेशनल बैंक की मंगलौर शाखा में अशोक कुमार भारद्वाज मैनेजर के पद तैनात थे। उस वक्त चंद्रिका इंडस्ट्रीज, बालाजी ऑयल, भगवती बेसन मिल, जिंदल होजरी, शिव दाल मिल और मैसर्स न्यू एमपीएस स्पीकर्स नाम की फर्म से लोन के लिए आवेदन किया गया था। उन्हें बैंक ने खादी ग्रामोद्योग प्रायोजित योजना के तहत लोन दिया था।
साथ ही दीपक इंटरप्राइजेज और चंद्रिका ट्रेडिंग ने गन्ने की खोई का कारोबार करने के लिए क्रेडिट लिमिट बनवाई थी। वर्ष 2006 में जब वहां राकेश शर्मा नाम के वरिष्ठ मैनेजर पद पर आए तो उन्होंने सारा खेल पकड़ लिया। पता चला कि इन फर्म के मालिकों ने फर्जी तरीके से कागजात जमा किए हुए थे। इसके अलावा तमाम संपत्तियां जो उन्होंने गिरवी रखी हुई थी उनमें भी ज्यादातर फर्जी थीं। यही नहीं कई संपत्तियों का मूल्य बढ़ाया हुआ था।
सीबीआई ने जांच की और फर्म मालिक और बैंक अधिकारियों के खिलाफ आठ मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें अशोक कुमार भारद्वाज बैंक मैनेजर, रामकिशोर कुकरेती बैंक अधिकारी (ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है), दीपक इंटरप्राइजेज के संचालक सुबोध पंडित (ट्रायल के दौरान मृत्यु हो चुकी है।), चंद्रिका इंडस्ट्रीज की संचालक सुधा पंडित, बालाजी ऑयल के मालिक सुशील कुमार शर्मा, एनपीएस स्पीकर्स के निशांत शर्मा, एक सप्लायर रोशनल अलि, जिंदल होजरी के मुकेश और विपिन कुमार के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए थे।
सीबीआई के अधिवक्ता ने बताया कि इनमें से पूर्व मैनेजर अशोक कुमार भारद्वाज निवासी द्वारका, दिल्ली को पांच साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बाकी सभी को तीन-तीन साल की सजा और 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। ये सभी दोषी खतौली, मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं। सीबीआई की ओर से सीनियर पीपी सतीश गर्ग और अमिता शर्मा ने भी पैरवी की थी।
खुद ही बन गए मालिक और सप्लायर
दोषियों ने बैंक को चूना लगाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। इन्होंने ऐसी फर्म बनाई जिसके वह मालिक भी खुद थे और प्रमोटर भी। सप्लायर भी खुद बने। उन्होंने फर्जी बिल प्रस्तुत किए। साथ ही मशीनों की कोटेशन भी खुद ही बनाई। उन्होंने न तो फैक्ट्री लगाई और न ही मशीनें खरीदीं।