प्रदेश की जेलों में अब अंदर और बाहर की हर गतिविधि कैमरे में कैद होगी, क्योंकि जेल प्रशासन जल्द ही दस जेलों में 700 सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करने जा रहा है। इसके लिए करीब पांच करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है। खासतौर से अपराधियों से मिलने आने वाले संदिग्ध लोगों के अलावा बंदी रक्षकों द्वारा ली जाने वाली तलाशी भी कैमरे की नजर में ही होगी।
जेलों से अपराध संचालित होने की घटनाएं किसी से छिपी नहीं हैं। जेल में बंद कुख्यात सुनील राठी के इशारे पर रुड़की कारागार में चीनू पंडित पर जानलेवा हमला किया गया था।
वहीं, अमित भूरा ने पेशी के दौरान पुलिस हिरासत से फरार होने की पूरी साजिश जेल में रहते हुई ही रची थी। इस समय सुनील राठी, चीनू पंडित और संजीव जीवा से जुड़े कई अपराधी जेल में बंद हैं। हत्या की सुपारी और रंगदारी मांगने जैसी घटनाएं अक्सर प्रकाश में आती रही हैं।
संवेदनशीलता के मद्देनजर जेलों में पहले भी सीसीटीवी कैमरे लगाए थे, लेकिन संख्या पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में पूरी जेल की निगरानी करना मुमकिन नहीं है। देहरादून और हरिद्वार में सिर्फ पांच से लेकर छह कैमरे चालू हालत में हैं, लेकिन इनकी भी नियमित रूप से मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है।
कई जेलों में रख-रखाव न होने के कारण कै मरे खराब हो गए। इस बार जेल प्रशासन व्यापक स्तर पर कैमरे लगाने की तैयारी में है। इस बार कैमरों के लिए पांच करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। देहरादून और हरिद्वार के अलावा, रुड़की, टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा, चमोली, सितारगंज समेत दस जेलों में जुलाई माह तक 700 कैमरे लगाने का टारगेट है।
पुलिस महानिरीक्षक पीवीके प्रसाद ने बताया कि जेल प्रदेश की 10 जेलों में जल्द 700 सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ उन्हें आधुनिक बनाने की तैयारी है। कैमरों के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फुटेज का नियमित रूप से अवलोकन करने के साथ उसके रख-रखाव में किसी तरह की कोताही न बरती जाए।