डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि सरगना संजय कुमार ने यह पूरी साजिश रची थी। बदमाशों ने अपने शिकार को झांसा दिया था कि एक परिचित की डेड कंपनी में दो नंबर के पांच करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। ऐसे में इस रकम को व्हाइट मनी साबित करना उनके लिए मुश्किल है।
वे पांच करोड़ रुपये उन्हें स्थानांतरित कर सकते हैं। इसके बदले उन्हें ढाई करोड़ रुपये चाहिए। ढाई करोड़ रुपये दिखाने के बाद पांच करोड़ आरटीजीएस के माध्यम से खाते में स्थानांतरित कर दिए जाएंगे। गैंग के कुछ बदमाश बाहर खड़े थे, जो इशारा मिलते ही अंदर घुसकर पूरा कैश लूट ले जाते।
बाल-बाल बचा ऋषिकेश का ज्वेलर
एसपी देहात प्रमेन्द्र डोभाल के मुताबिक गैंग के सरगना संजय कुमार ने देवेन्द्र कटारिया के माध्यम से पहले ऋषिकेश के गढ़वाल ज्वेलर्स के मालिक को पांच करोड़ के बदले ढाई करोड़ का भुगतान करने के लिए तैयार कर लिया था। 31 दिसंबर को गैंग योजना के मुताबिक गढ़वाल ज्वैलर्स के यहां पहुंच गए। लेकिन, व्यापारी के पास उस दिन कैश नहीं होने के कारण घटना को अंजाम नहीं दे पाए।
अगले दिन गढ़वाल ज्वेलर्स के मालिक ने फोन कर तीन करोड़ रुपये स्थानांतरित करने को कहा। उसने बताया कि डेढ़ करोड़ रुपये का कैश उसके पास है। गैंग का सरगना बाकी बदमाशों के साथ ज्वेलर के यहां पहुंच गया। डेढ़ करोड़ रुपये देखने के बाद इन लोगाें ने बाहर खड़े साथियाें में से एक को मैनेजर संबोधित करते हुए रकम आरटीजीएस से ऑनलाइन ट्रांसफर करने को कहा। इसके पीछे इशारा अंदर आने का था। बाहर खड़े साथी ने पुलिस के सक्रिय होने की जानकारी दी तो डकैती की योजना को स्थगित कर दिया गया।
शराब कारोबारी तक नहीं पहुंच पाए बदमाश
एसपी सिटी श्वेता चौबे ने बताया कि ऋषिकेश में विफल होने के बाद गैंग ने फरमान के माध्यम से मोटे कमीशन का लालच देकर पहले बलवीर सिंह नौटियाल उर्फ पंडित को अपने साथ जोड़ा। वह यजमानों के यहां पूजा पाठ के अलावा प्रापर्टी डीलिंग का काम करता था। पंडित ने भटनागर नाम के एक व्यक्ति के माध्यम से दून के शराब कारोबारी टोनी जायसवाल को ढाई करोड़ रुपये देने को तैयार कर लिया। पूरा गैंग हरिद्वार से देहरादून शिफ्ट हो गया, लेकिन पुलिस ने जायसवाल से मिलने से पहले ही उन्हें दबोच लिया।