ढैंचा बीज घोटाला प्रकरण में त्रिपाठी आयोग की जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पर उत्तराखंड सरकार को हाईकोर्ट में जवाब देना होगा।
इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में प्रति शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई हुई। गाजियाबाद निवासी जयप्रकाश डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि वर्ष 2005-06 में उत्तराखंड में खरीफ की फसल को बढ़ावा देने के बाद ढैंचा बीज वितरण की योजना बनाई गई।
उसके बाद 9 फरवरी 2010 को तत्कालीन डायरेक्टर कृषि विभाग ने योजना को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश दिए। उसी दिन हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, देहरादून व चंपावत में 14900 क्विंटल बीज की आवश्यकता जाहिर करते हुए टेंडर करवा दिए गए।
टेंडर 60 प्रतिशत अधिक दरों पर करवा दिए और सप्लाई भी अधिक कर दी। 25 फरवरी 2010 को बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए निजी संस्था निधि सीड्स को ठेका दे दिया। 2013 में इस मामले की जांच के लिए त्रिपाठी आयोग का गठन किया गया।
याचिकाकर्ता के मुताबिक रिपोर्ट में घोटाले के आरोपों को सही पाया गया और इसके लिए भाजपा सरकार में कृषि मंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत, तत्कालीन कृषि सचिव ओम प्रकाश और मदन लाल को जिम्मेदार ठहराया गया है। फिर भी आरोपियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को याचिककर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।