प्रदेश में प्रिंसिपलों की सेवा नियमावली संशोधित होगी। संशोधन के लिए शिक्षा निदेशालय की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जिसे आगामी कैबिनेट की बैठक में लाए जाने की तैयारी है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो 50 फीसदी पदों पर सीधी भर्ती का रास्ता साफ होगा। इसके अलावा उनके तदर्थ प्रमोशन पर भी विचार किया जा रहा है।
प्रदेश के इंटरमीडिएट कालेजों में प्रिंसिपलों के लगभग 900 पद रिक्त हैं। शासन की ओर से इन पदों को भरने की कवायद की जा रही है। शासन के निर्देश पर शिक्षा निदेशालय ने शासन को इसका प्रस्ताव भेजा है। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर के मुताबिक प्रदेश में हाईस्कूल की तुलना में इंटरमीडिएट कालेज अधिक हैं। ऐसे में हाईस्कूलों में कार्यरत हेडमास्टरों के प्रमोशन से इंटरमीडिएट कालेजों के सभी पद नहीं भर पा रहे हैं। हाईस्कूल के हेडमास्टर का इंटरमीडिएट कालेज में प्रिंसिपल के पद पर प्रमोशन के लिए उसका हेड मास्टर के पद पर पांच साल की सेवा का होना भी अनिवार्य है।
शिक्षा निदेशक ने कहा कि प्रिंसिपल के रिक्त सभी पदों को भरा जा सके इसके लिए अब 50 फीसदी पदों को विभागीय सीधी भर्ती से एवं शेष 50 फीसदी पदों को प्रमोशन से भरा जाएगा। इन पदों को भरने के लिए नियमावली में संशोधन किया जाना है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आगामी बैठक में इसका प्रस्ताव लाए जाने की तैयारी है। जिसे मंजूरी मिली तो प्रिंसिपलों के शत प्रतिशत पदों को भरा जा सकेगा।
प्रिंसिपलों के रिक्त पदों को तदर्थ पदोन्नति से भरा जाना चाहिए। प्रिंसिपल का पद 7600 ग्रेड पे वाला पद है। लोक सेवा आयोग द्वारा इन पदों पर सीधी भर्ती करना आसान नहीं होगा, शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए हर कालेज में प्रिंसिपल होना चाहिए।
-एसएस बिष्ट, अध्यक्ष राजकीय प्रिंसिपल एसोसिएशन