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Uttarakhand: पर्यावरणीय सेहत की निगरानी के लिए एसईपीआई तैयार, इकोनॉमी ग्रोथ के इकोलॉजी को भी जानेंगे

Fri, 02 Jan 2026 07:00 AM IST
रेनू सकलानी विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

पर्यावरणीय सेहत की निगरानी के लिए तैयार किए गए एसईपीआई के तहत आठ सेक्टर और 86 इंडीकेटर रखे गए है, सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस ने इसे तैयार किया है।

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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्य में इकोनॉमी ग्रोथ के साथ इकोलॉजी की स्थिति कैसी है, इसकी निगरानी के लिए सस्टेनेबल एनवायरमेंट परफॉर्मेंस इंडेक्स (एसईपीआई) तैयार किया गया है। इसमें आठ सेक्टर और 86 इंडीकेटर रखे गए हैं। राज्य की आर्थिकी तथा पर्यावरण संबंधी संकेतकों के आधार पर एसईपीआई को तैयार करने का काम नियोजन विभाग के सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (सीपीपीजीजी) ने शुरू किया था।

सीपीपीजीजी के निदेशक मनोज कुमार पंत ने बताया कि एसईपीआई को तैयार कर लिया गया है। इसमें आठ सेक्टर कृषि, वन, पर्यटन, पेयजल, ऊर्जा, मानव स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास-शहरी विकास, आपदा को रखा गया है। इसके अंतर्गत 86 इंडीकेटर है। इनके माध्यम पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन की दिशा में यह महत्वपूर्ण है। इससे दोनों तुलनात्मक स्थिति को देखा जा सकेगा।

इसके लिए बेस ईयर 2016-2017 रखा गया है। इस दिशा में पहले वर्ष 2018-2019 में इको सर्विसेज को लेकर इंडियन इंसटीट्यूट आफ फारेस्ट मैनेजमेंट भोपाल के माध्यम से पायलट के तौर पर तैयार किया था, अब इसे व्यापक तौर पर बनाया गया है। यह अभी राज्य स्तर पर बनाया गया है। भविष्य में जिले स्तर पर एसईपीआई को तैयार करने की योजना है, जिससे जिले स्तर पर होने वाले बदलावों के बारे में भी स्थानीय प्रशासन को पता रहे। अधिकारियों के अनुसार एसईपीआई अनुमोदन से जुड़ी कार्रवाई की जा रही है।

 

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सुधार के कदम उठाए जा सकेंगे

निदेशक पंत ने बताया कि एसईपीआई तैयार होने से कई जानकारी मिल सकेंगी। जैसे फैक्ट्री लग रही है, जल का दोहन हो रहा है। साथ ही दोहन की तुलना में भूमिगत जलस्रोतों को रिचार्ज करने के लिए कितना काम हुआ है, यह पता रहेगा। अगर नहीं हुआ, तो संबंधित विभाग इस दिशा में काम कर सकेंगे।

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इसी तरह अगर प्लास्टिक एक चुनौती है, इसका उत्पादन, उपयोग बढ़ रहा है पर उसकी तुलना में उसका प्रासेस नहीं हो रहा है, तो यह पर्यावरण के लिए समस्या रहेगी तो उसकी जानकारी होने पर प्रयास हो सकेंगे। इसी तरह प्लांटेशन के माध्यम से हरियाली को लेकर काम हो सकेगा। अधिकारियों के अनुसार पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए आर्थिकी को बेहतर करना है।

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