डिप्रेशन का थे शिकार, पहले भी कर चुके थे जान देने की कोशिश
पुलिस का कहना है कि जानकारी मिली है कि डॉ. अरोड़ा पिछले काफी समय से डिप्रेशन का शिकार थे। पुलिस ने बताया कि कुछ समय पहले भी उन्होंने नहर में कूदकर जान देने की कोशिश की थी, लेकिन तब वहां से गुजर रहे ग्रामीणों ने सुरक्षित नहर से बाहर निकाल लिया था। बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पहले उनकी पत्नी की भी मौत हो गई थी। अमेरिका में रहने वाली उनकी एक डॉक्टर बेटी की भी कुछ साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उनकी दूसरी बेटी भी अमेरिका में डॉक्टर है। पत्नी और एक बेटी को खोने के बाद वह गुमसुम रहने लगे थे।
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47 साल से अधिक समय से कर रहे थे प्रैक्टिस
मेरठ मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी मेडिसिन करने के पश्चात डॉ. हंसराज अरोड़ा ने लगभग 47 साल पहले विकासनगर में प्रैक्टिस शुरू की थी। पछवादून के तमाम गांवों के निवासियों से लेकर जौनसार बावर व हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से प्रतिदिन भारी संख्या में रोगी उनके पास आते थे। डॉ. अरोड़ा के बेटे आयुष अरोड़ा भी चिकित्सक हैं। वह पिता के क्लीनिक पर बैठते हैं। डॉ. अरोड़ा शहर के वरिष्ठ चिकित्सक के अलावा सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े थे। उनकी मृत्यु पर लायंस क्लब, रोटरी क्लब, जन संघर्ष मोर्चा, विकासनगर बार एसोसिएशन, कालसी बार एसोसिएशन, आईएमए, संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच, नगर व्यापार मंडल, संयुक्त व्यापार मंडल आदि समेत सभी संस्थाओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया है।