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भारत-नेपाल के रिश्तों में किसी ‘तीसरे’ की घुसपैठ पैदा कर सकती है खतरा- त्रिवेंद्र

Tue, 11 Apr 2017 11:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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भारत-नेपाल के रिश्तों और सुरक्षा में किसी ‘तीसरे’ की घुसपैठ दोनों देशों के लिए खतरा है। कुछ ऐसे तत्व हैं जो दोनों देशों के बीच दरार पैदा करना चाहते हैं। शत्रु पक्ष को यह कतई मंजूर नहीं की भारत-नेपाल के रिश्ते मधुर रहें। लिहाजा ऐसे तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है।
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मंगलवार को भारतीय वन अनुसंधान केंद्र (एफआरआई) के सभागार में ‘भारत नेपाल संबंध और सुरक्षा’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद भारत और नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान नेपाल की ओर से आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के पहले दिन विशेषज्ञों ने यह चिंता जताई। 

गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि नेपाल के साथ हमारे गहरे और दीर्घकालिक रिश्ते हैं। कई लोग हमें अलग करने की कोशिश में लगे हैं। इसलिए हमारे बीच कोई घुसपैठ कतई मंजूर नहीं होनी चाहिए। उत्तराखंड और नेपाल के लोगों में तो रोटी-बेटी के संबंध हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक रिश्ते और एकता भविष्य में भी बना रहना बहुत जरूरी है
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नेपाल के पूर्व विदेश सचिव आचार्य मधु रमण ने भारत के साथ आपसी संबंधों को महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से हमें एक दूसरे देशों को सहायता प्रदान करनी चाहिए। किसी भी मामले को राजनीति की भेंट नहीं चढ़ाना चाहिए।

भारत के पूर्व विदेश सचिव एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के संरक्षक शशांक ने कहा कि जो भारत में रहता है, उसमें भारतीयता मूल रूप से होती है। चाहे वह मुस्लिम, ईसाई हो या और कोई हो। अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव श्याम परांडे ने कहा कि दोनों देशों के लोग सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक, धार्मिक व आध्यात्मिक रूप से एक हैं।

शत्रु पक्ष हम दोनों को अलग करना चाहता है। लिहाजा हमें आपस में समन्वय बनाकर कार्य करना होगा। गोष्ठी में नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान के निदेशक दीपक अधिकारी, गोपाल अरोरा के अलावा दोनों देशों के पूर्व सैन्य, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भारत नेपाल के संबंध व सुरक्षा पर विचार व्यक्त किए।
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