सरकार का प्रयास है कि सभी महाविद्यालयों में फैकल्टी की इस कमी को जल्द दूर कर लिया जाए। हालांकि महाविद्यालयों में जब तक नियमित नियुक्ति के शिक्षक नहीं मिलते, नितांत अस्थाई व्यवस्था के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री के मुताबिक प्रयास किया जा रहा है कि अगले दो वर्षों के भीतर इन सभी महाविद्यालयों में फैकल्टी की कमी को दूर कर लिया जाए।
यह है उच्च शिक्षा में फैकल्टी का हाल
प्रदेश के 105 सरकारी महाविद्यालयों में प्राचार्य के 21 और असिस्टेंट प्रोफेसरों के 342 पद रिक्त हैं। जबकि 38 महाविद्यालयों के पास पूर्ण भवन नहीं हैं। इनमें 18 महाविद्यालयों में भवन निर्माणाधीन हैं, 10 महाविद्यालयों को भवन के लिए अब भूमि मिली है। वहीं, अन्य 10 महाविद्यालयों के भवन निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश भर में मात्र 67 महाविद्यालय ही अपने भवनों में चल रहे हैं।