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उत्तराखंड: फैकल्टी पूरी होते ही महाविद्यालयों में फिर शुरू होगा सेमेस्टर सिस्टम

Mon, 16 Dec 2019 07:53 AM IST
अलका त्यागी बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • छात्रों के विरोध के बाद सरकार ने इसे इसी वर्ष यूजी में किया है बंद
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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प्रदेश के महाविद्यालयों में फैकल्टी पूरी होते ही सेमेस्टर सिस्टम फिर शुरू हो जाएगा। छात्रों के विरोध के बाद सरकार ने इसे इसी वर्ष यूजी में बंद किया है। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के मुताबिक सेमेस्टर सिस्टम को फैकल्टी पूरी होने के बाद सभी महाविद्यालयों में फिर शुरू किया जाएगा। सरकार की ओर से प्रयास किया जा रहा है कि सभी महाविद्यालयों में जल्द फैकल्टी पूरी कर ली जाए। इसके लिए लोक सेवा आयोग में अधियाचन किया गया है।

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प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों के विरोध के बाद सरकार ने इसी वर्ष यूजी में सेमेस्टर सिस्टम बंद किया है। इन छात्रों का इस बात को लेकर विरोध था कि महाविद्यालयों में फैकल्टी पूरी नहीं है। ऐसे में सेमेस्टर सिस्टम के चलते समय पर परीक्षाएं नहीं हो पा रही हैं। वहीं कई बार परीक्षा परिणाम भी लटक रहे हैं। निर्धारित समय परीक्षाएं एवं परीक्षा परिणाम जारी हों, इसके लिए सेमेस्टर सिस्टम को बंद किया जाए।

अब सेमेस्टर सिस्टम को बंद करने के फैसले के बाद प्रदेश के तमाम महाविद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं आयोजित किए जाने की तैयारी है, लेकिन फैकल्टी की कमी पूरी होते ही इन महाविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम फिर से शुरू हो जाएगा। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के मुताबिक जरूरी सुविधाओं और फैकल्टी की कमी के चलते केवल यूजी में सेमेस्टर सिस्टम को बंद किया गया है।

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अस्थाई व्यवस्था के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई

सरकार का प्रयास है कि सभी महाविद्यालयों में फैकल्टी की इस कमी को जल्द दूर कर लिया जाए। हालांकि महाविद्यालयों में जब तक नियमित नियुक्ति के शिक्षक नहीं मिलते, नितांत अस्थाई व्यवस्था के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री के मुताबिक प्रयास किया जा रहा है कि अगले दो वर्षों के भीतर इन सभी महाविद्यालयों में फैकल्टी की कमी को दूर कर लिया जाए।

यह है उच्च शिक्षा में फैकल्टी का हाल
प्रदेश के 105 सरकारी महाविद्यालयों में प्राचार्य के 21 और असिस्टेंट प्रोफेसरों के 342 पद रिक्त हैं। जबकि 38 महाविद्यालयों के पास पूर्ण भवन नहीं हैं। इनमें 18 महाविद्यालयों में भवन निर्माणाधीन हैं, 10 महाविद्यालयों को भवन के लिए अब भूमि मिली है। वहीं, अन्य 10 महाविद्यालयों के भवन निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश भर में मात्र 67 महाविद्यालय ही अपने भवनों में चल रहे हैं।
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