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आंख मूंदकर सचिवालय की आवासीय परियोजना को मंजूरी

Fri, 14 Oct 2016 10:58 AM IST
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
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रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के तहत मिलने वाली जमीन पर उत्तराखंड सचिवालय आवासीय सहकारी समिति की प्रस्तावित आवासीय योजना को नियम दरकिनार कर मंजूरी दे दी गई।
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बड़े पैमाने पर हो रही प्लॉटिंग और आवासीय कॉलोनी के लिए कैंट अधिकारियों ने ऐसी जमीन पर नक्शा पास कर दिया, जहां कोई सड़क ही नहीं है। इसके लिए अधिकारियों ने एमडीडीए अधिकारियों और कैंट बोर्ड के पदाधिकारियों की आपत्ति तक दरकिनार कर दी। योजना में सचिवालय कर्मियों के अलावा अन्य विभागों के कर्मचारियों ने भी प्लॉट खरीदे हैं।

दरअसल, भारूवाला ग्रांट क्षेत्र में नदी से लगी हुई कास्तकारों की करीब साढ़े तीन सौ बीघा जमीन है। कुछ समय पहले एमडीडीए ने यह जमीन लैंड पूलिंग अथवा भू अधिग्रहण योजना के तहत लेने की योजना तैयार की थी। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की योजना यहां रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के प्रभावितों के लिए आवासीय योजना तैयार करने की थी। लेकिन इससे पहले ही सचिवालय कर्मियों ने उत्तराखंड सचिवालय आवासीय सहकारी समिति बनाकर कैंट बोर्ड में आवासीय योजना का लेआउट जमा करा दिया।
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इसके बाद एमडीडीए ने योजना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिल्डिंग बायलाज के अनुसार 12 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर हाउसिंग प्रोजेक्ट पास नहीं हो सकता। जिस जमीन पर योजना का लेआउट जमा कराया गया है, वहां 12 मीटर तो दूर सड़क तक नहीं है। कैंट बोर्ड के पदाधिकारियों ने भी इस पर आपत्ति जताई। यही नहीं आवासीय योजना को लेकर बोर्ड बैठक में हंगामा तक हुआ। इसके बावजूद अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से योजना को मंजूरी दे दी। वहीं, इस मामले में कैंट बोर्ड के सीईओ पंकज कुमार ठाकुर से उनका पक्ष जानने की कोशिश कई गई तो उन्होंने कहा कि मैं अभी छुट्टी पर हूं, लौटने पर ही कुछ बता पाऊंगा।

कैसे खरीदी करोड़ों की जमीन
आवासीय योजना के लिए समिति ने करोड़ों की जमीन खरीदने को पैसा कैसे जुटाया, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। समिति अध्यक्ष प्रदीप पपनै के अनुसार 70 लाख रुपये बीघा की दर से 100 बीघा जमीन खरीदी गई। इस लिहाज से जमीन की कीमत सात करोड़ रुपये बैठती है। उन्होंने बताया कि कर्मियों ने पैसा जोड़कर योजना के लिए बजट का इंतजाम किया है। 

किसानों की जमीन पर लेआउट पास
सचिवालय आवासीय सहकारी समिति पर मेहरबानी के लिए अधिकारियों ने सारे नियम ताक पर रख दिए। समिति ने जमीन खरीदने से पहले ही लेआउट जमा करा दिया। कास्तकारों के नाम पर जमीन का लेआउट कैंट ने समिति के नाम पर पास भी कर दिया। जबकि, नियमानुसार लेआउट के लिए केवल भूस्वामी ही आवेदन कर सकता है।

रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना के ब्लू प्रिंट में सड़क है। क्लेमेंटटाउन कैंट बोर्ड से नक्शा पास है। एमडीडीए ने कहा कि वहां आवासीय योजना बननी है। इस पर हमने कहा कि जमीन तो कैंट की है, एमडीडीए की नहीं। 160 बीघे पर प्लाटिंग की योजना थी, लेकिन अब हम करीब 120 बीघा पर ही काम करेंगे। हमारे पास कारगी चौक से भी रास्ते का विकल्प है। जरूरत पड़ी तो वहां से रास्ता बनाया जाएगा। 
- प्रदीप पपनै, अध्यक्ष, उत्तराखंड सचिवालय आवासीय सहकारी समिति

जब आवासीय परियोजना का लेआउट जमा कराया गया था, उस दौरान हमने दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी। तब हमें कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इस पूरे मामले में बड़ा खेल हुआ है। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
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- सुनील कुमार, उपाध्यक्ष, क्लेमेंटटाउन कैंट बोर्ड

हमने कैंट बोर्ड को रास्ता नहीं होने की जानकारी देते हुए लेआउट पास ना करने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद कैंट बोर्ड ने बिना सड़क के कैसे लेआउट पास किया, यह बोर्ड के अधिकारी ही बता सकते हैं। एमडीडीए ना तो रास्ता बना रहा है और ना ही भविष्य में बनाने की योजना है। हमारी जानकारी के अनुसार आवासीय योजना के लिए रास्ता नहीं है।
- प्रकाश चंद्र दुमका, सचिव, एमडीडीए
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