1942 में आर्मी में भर्ती हुए कैप्टन चंद्र बहादुर ने द्वितीय विश्व युद्ध में अपनी वीरता दिखाई थी। कार्की 1970 में नाइन गोरखा रेजीमेंट से आनरेरी कप्तान के पद से रिटायर हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद वह समाज सेवा में लगे रहे।
कार्की अपने पीछे पत्नी दमयंती कर्मी के अलावा चार बेटों सेवानिवृत्त मेजर प्रहलाद कार्की, मणि कार्की, दीपक कार्की (सर्वे ऑफ इंडिया में सीनियर अकाउंटेंट) औैर किरण कार्की (एमबीबीएस) को छोड़ गए हैं। कार्की का बड़ा पोता दीक्षांत कार्की आर्मी में मेजर है। गोर्खाली समाज की मीडिया प्रभारी प्रभा शाह ने कार्की के निधन को समाज के लिए अपूर्णीय क्षति बताया है। उन्हाेंने बताया कि कार्की भूटान आर्मी के पहले भारतीय प्रशिक्षक थे।