इस साल हुई भारी बर्फबारी से चीन सीमा क्षेत्र में स्थित गांवों के ग्रामीण भी अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं। साथ ही आईटीबीपी और सेना के जवानों को भी आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नीती घाटी में जोशीमठ-मलारी हाईवे पर नीती गांव से आगे करीब छह फीट तक बर्फ जमी हुई है, जबकि बॉर्डर एरिया सुमना, लपथल, बाड़ाहोती, रिमखिम में आठ से दस फीट तक बर्फ जम गई है। घाटी के लाता, सुरांईथोटा व तपोवन क्षेत्र के गांवों में ग्रामीणों की बर्फबारी में आवाजाही की दिक्कतें बढ़ गई हैं। इन गांवों के ग्रामीण अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं।
माणा घाटी में भी यही स्थिति बनी हुई है। यहां बद्रीनाथ हाईवे पर हनुमान चट्टी से आगे करीब आठ फीट बर्फ जमी हुई है। देश का अंतिम गांव माणा भी बर्फ से पूरी तरह से ढक गया है। शीतकाल में इस गांव के ग्रामीण हालांकि निचले क्षेत्रों में आ जाते हैं, लेकिन यहां स्थित आईटीबीपी कैंपों में रह रहे जवानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सीमा सड़क संगठन के कमांडर एसएस मक्कर का कहना है कि मलारी तक हाईवे को सुचारू रखने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। मौसम सामान्य होने के बाद बद्रीनाथ हाईवे के हनुमान चट्टी से भी बर्फ हटाने का काम शुरू किया जाएगा।
मंगलवार रात्री से हो रही लगातार बारिश से संपूर्ण क्षेत्र शीतलहर की चपेट में आ गया है। देवाल ब्लॉक के रूपकुंड, वेदनी, आली बुग्याल, ब्रहमताल, बगजी बुग्याल में तीन से चार फीट बर्फ पड़ी है। लगातार बर्फबारी होने से भींकलताल जाने वाले 32 पर्यटकों का दल लोहाजंग में मौसम खुलने का इंतजार कर रहा है। लोहाजंग-वांण व घेस- हिमनी में सड़क बंद हो गयी है। जबकि सूया, वाण, कुलिंग, वांक, मुंदोली, लोहाजंग, घेस, हिमनी, पिनांऊ, बलाड़, सौरीगाड़, रामपुर, तोरती गांव बर्फ से लकदक हो गए हैं।
बर्फबारी से गांवों की पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और पैदल रास्ते अवरुद्व होने से ग्रामीण घरों में कैद हो गए हैं। जबकि थराली में हो रही भारी बारिश से कास्तकारों की आलू, प्याज और मटर की फसलें सड़ गई हैं। कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालदम के वैज्ञानिक अनिल चंद्रा ने कास्तकारों को अपनी उपजाऊ फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों से पानी की निकासी करने को कहा है। जबकि गैरसैंण, आदिबदरी, कर्णप्रयाग, गौचर आदि स्थानों पर हो रही बारिश से तापमान में गिरावट आ गई है।
उत्तरकाशी जिले में मंगलवार रात से निचली घाटियों में रुक-रुक कर बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के चलते कड़ाके की ठंड एक बार फिर लौट आयी है। तापमान में जबर्दस्त गिरावट आने के कारण जिले में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। जिले में सौ से अधिक गांवों में बर्फ की चादर बिछ जाने से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। भारी बर्फबारी के कारण यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे समेत ऊंचाई वाली सड़कों पर यातायात अवरुद्ध हो गया है। जिससे दर्जनों गांवों का जिला एवं तहसील मुख्यालय से सड़क संपर्क कट गया है।
बीते कुछ दिनों से चटक धूप के साथ खुशगवार रहने के बाद मंगलवार रात को मौसम ने फिर करवट ली। निचली घाटियों में रुक-रुक कर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला मंगलवार रात से ही शुरू हो गया था। बुधवार देर शाम तक भी बारिश-बर्फबारी का दौर जारी है। जनपद में समुद्र सतह से 1800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। जिससे यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम के साथ ही गंगा घाटी में उपला टकनौर, यमुनोत्री घाटी में गीठ वजरी पट्टी, पुरोला प्रखंड में सरबडियार क्षेत्र तथा मोरी प्रखंड में गोविंद वन्य जीव विहार क्षेत्र के कुल सौ से अधिक गांव बर्फ में कैद हो गए हैं। इन गांवों में भारी बर्फबारी के चलते लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं।
बीते दिनों जहां पारा 20 डिग्री सैल्सियस तक पहुंच गया था, वहीं बुधवार को जिला मुख्यालय पर अधिकतम तापमान 6 डिग्री और न्यूनतम माइनस 2 डिग्री सैल्सियस दर्ज किया गया। जबकि बर्फबारी वाले क्षेत्रों में पारा शून्य से नीचे पहुंच गया है। तापमान में गिरावट और बर्फबारी से उपजी सर्द हवाओं के चलते जिले में हाड़ कंपाने वाली ठंड ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।
उत्तरकाशी जिले में मंगलवार देर रात से जारी बर्फबारी के चलते गंगोत्री हाईवे गंगनानी से आगे अवरुद्ध हो गया। बीआरओ के जवानों ने गंगनानी से सुक्की टॉप के बीच बर्फ हटाकर यातायात बहाल तो किया, लेकिन बर्फ के कारण यहां वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है। सुक्की टॉप से आगे हर्षिल, धराली एवं गंगोत्री की ओर वाहनों की आवाजाही ठप पड़ी है। धरासू-यमुनोत्री हाईवे राड़ी टॉप में बर्फ से अवरुद्ध हुआ। यहां पूर्वाह्न करीब 11 बजे बर्फ हटाकर यातायात बहाल किया गया। यहां भी सड़क फिसलन भरी होने और रुक-रुक कर बर्फबारी के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है।
इससे आगे रानाचट्टी से जानकीचट्टी के बीच बर्फबारी के चलते फिलहाल वाहनों के पहिए थमे हुए हैं। उत्तरकाशी-लंबगांव मोटर मार्ग भी चौरंगीखाल में बर्फबारी से अवरुद्ध हुआ था। यहां लोनिवि ने दोपहर करीब बारह बजे बर्फ हटाकर यातायात बहाल कर लिया। यहां भी वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है। इनके अलावा जिले में हर्षिल-मुखबा, सांकरी-तालुका, नैटवाड़-दोणी-भीतरी आदि सड़कों पर बर्फबारी के चलते यातायात ठप पड़ा है। सड़कें अवरुद्ध होने के कारण जिले के दर्जनों गांवों का जिला एवं तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है।
कोटद्वार भाबर और पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही सुबह से बारिश और बर्फबारी ने जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। पिछले 14 घंटों से रुक रुक कर हो रही बारिश के चलते पूरा क्षेत्र शीत लहर की चपेट में है। कड़ाके की ठंड से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। बुधवार को तड़के चार बजे से कोटद्वार और निकटवर्ती क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई। दिन भर रुक रुक कर हो रही बारिश ने मौसम का पारा गिरा दिया। भाबर क्षेत्र में ओलावृष्टि होने से किसानों को गेहूं की फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है। वहीं कोटद्वार शहर में बारिश के दौरान लोग अपने घरों में ही रहे, जिसके कारण सड़कों और बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। गरीब लोगों ने आग सेककर ठंडक भगाई।
लैंसडौन नगर और आसपास की पहाड़ियों पर हिमपात होने से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दोपहर एक बजे से शुरू हुई बर्फबारी दो घंटे तक चली। बर्फबारी का नजारा देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटक भी अपने कमरों से सड़कों पर उतर आए। बर्फबारी से देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पर्यटकों के चेहरे खिल गए। रूई की तरह पड़ती बर्फ की फाहों को कई पर्यटकों ने पहली बार देखा। दिल्ली से आए रवीना, निशा, शीतल, महेंद्र सिंह, रागिनी ने पहली बार जीवन में बर्फ गिरते देखी। शीतलहर के चलते कड़ाके की ठंड पड़ने से लोग अंगेठी सेकने को मजबूर हो गए। वहीं द्वारीखाल ब्लाक के चैलूसैंण में बर्फबारी से पूरा क्षेत्र कड़ाके की ठंड में है।
यमकेश्वर में मंगलवार शाम से हो रही बारिश के चलते कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। जिससे जनजीवन प्रभावित हो गया है। मंगलवार शाम साढ़े तीन बजे से यमकेश्वर ब्लाक में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, बारिश के साथ ओले के गिरने से क्षेत्र में एक बार फिर से ठंडक हो गयी है। बारिश होने से यमकेश्वर ब्लाक की बिजली गुल हो रखी है। ऐसे में तहसील यमकेश्वर, खंड विकास कार्यालय यमकेश्वर, खंड शिक्षा कार्यालय कांडी, पोस्ट ऑफिस भृगुखाल, आंगनबाड़ी एवं बाल विकास कार्यालय कांडी में कामकाज प्रभावित रहा।
हरिद्वार को दोपहर तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से मौसम में बेहद ठंड लौट आई। ओलावृष्टि होने से फसलों में नुकसान होने की आशंका रही। बारिश और ओलावृष्टि से बढ़ी ठंड से लोग परेशान रहे। बारिश का असर बाजार पर भी दिखा। कांवड़ मेला क्षेत्र में पानी भर जाने के कारण शिवभक्तों को भारी परेशानी का समाना करना पड़ा।
पिछले दो दिनों से छाए हुए घने बादलों से ठंड का प्रकोप जारी रहा। मंगलवार को दिन में हुई हल्की बूंदाबांदी के बाद पूरी रात तेज हवा चलती रही। रात में हल्की बूंदाबांदी भी हुई। मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी के अनुसार बुधवार की दोपहर बाद तीन बजे से बारिश पड़नी शुरू हुई। बारिश के साथ शुरू में हल्की हवा चलती रही, लेकिन कुछ ही देर में बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई। ओलावृष्टि होने से लोगों ने सड़क पर चलते हुए दुकानों एवं छज्जों के नीचे छिप कर खुद को सुरक्षित किया।
बारिश और ओलावृष्टि के कारण बाजार खाली हो गए। देर शाम तक स्थिति ऐसी ही बनी रही। ओलावृष्टि का असर फसलों पर पड़ा है। इससे गेहूं की फसल गिर गई तो मटर, सरसों एवं दलहन की फसलों को नुकसान पहुंचा। जिला मुख्य कृषि अधिकारी वीकेश कुमार यादव की मानें तो बारिश से घाड़ क्षेत्र में फसलों को फायदा पहुंचा है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में ओला पड़ने की सूचना मिली है। ओले की मोटाई कम होने से फसलों को कम नुकसान हुआ है। फसलों में मसूर की फसल पर नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि फसलों के नुकसान का आकलन किया जाएगा।