देहरादून। हिमालयी राज्यों में हर साल भूस्खलन से होने वाली भारी तबाही, जानमाल का नुकसान कम करने, प्राकृतिक आपदा को रोकने के उपायों पर मंथन करने के लिए देश दुनिया के वैज्ञानिक 13 मार्च से वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी में जुटेंगे। दो दिवसीय सेमिनार में देश के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों के अलावा नार्वे, नीदरलैंड और ब्रिटेन के कई भूविज्ञानी याख्यान देंगे।
सेमिनार के संयोजक व वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विक्रम गुप्ता ने बताया कि सेमिनार में भूस्खलन के कारण, रोकने के उपाय, जलवायु परिवर्तन के चलते भूस्खलन पर पड़ने वाले प्रभावों, अर्ली वार्निंग सिस्टम, लैंडस्लाइड मैकेनिज्म पर मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉ. विक्रम गुप्ता के मुताबिक भूस्खलन के चलते उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों में हर साल जानमाल का भारी नुकसान होता है। सेमिनार में जियोलॉजिकल सर्वे आफ नॉर्वे के महानिदेशक मेब्रिट मायर, नार्वे के ही वैज्ञानिक डॉ. रेगीनाल्ड हरमंस, नॉर्वे जिओ टेक्निकल इंस्टीट्यूट ओस्लो के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र के अलावा देश के कई आईआईटी समेत अन्य तकनीकी संस्थानों के वैज्ञानिक व्याख्यान देंगे। सेमिनार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव प्रो. आशुतोष शर्मा, डॉ. एम राजीवन, प्रोफेसर अशोक साहनी, वाडिया इंस्टीट़्यूट के निदेशक कलाचंद सांई समेत कई वैज्ञानिक हिस्सा लेंगे।