जून में आई आपदा के बाद केदारनाथ मंदिर पर भूगर्भ वैज्ञानिकों द्वारा कई चौंकाने वाली बाते सामने आईं। लेकिन डॉ. पीसी नवानी के इस सुझाव ने मंदिर पर एक नई बहस छेड़ दी है।
भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण (जीएसआई) के पूर्व विशेषज्ञ डॉ. पीसी नवानी ने भविष्य में खतरे को देखते हुए केदारनाथ मंदिर को कहीं अन्यत्र स्थापित किए जाने संबंधी राय दी।
नेशनल सोसायाटी ऑफ इंजीनियरिंग जियोलाजी (एनएसईजी) के जियो टेक्निकल प्रोग्राम के उद्घाटन के दौरान डॉ. नवानी ने आपदा के बाद नदियों के चैनलाइजेशन और रिस्ट्रक्चरिंग को भी समय और पैसे की बर्बादी करार दिया था।
अन्य विशेषज्ञ इससे इत्तेफाक नहीं रखते। भू-वेत्ता डॉ. एके बियानी के मुताबिक केदारनाथ में तो सिर्फ लैंड स्लाइड रोकना है, जिसके ट्रीटमेंट के कई तरीके हैं। मलबा तो यहां दूर से पहुंचा है।
इससे बचाने के लिए मंदिर के चारों ओर मजबूत रिटेनिंग वॉल तैयार की जा सकती है। जरूरत ग्लेशियर से बनी अन्य झीलों के साथ ही चोराबाड़ी झील की मॉनिटरिंग की थी। आज भी यह सबसे बड़ी जरूरत है।
राजनीतिक दबाव में की जा रहा रिस्ट्रक्चरिंग
इसके लिए केदारनाथ मंदिर को शिफ्ट किए जाने की जरूरत नहीं है। भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण के एक उच्चाधिकारी भी नवानी की बात से सहमति नहीं जताते। उनके मुताबिक यह नवानी की व्यक्तिगत राय है।
फिलहाल, मंदिर परिसर और इसके आस-पास बोल्डर का स्टेबलाइजेशन, रिटेनिंग वॉल का निर्माण, भागीरथी मंदाकिनी का चैनलाइजेशन जरूरी है।
बता दें कि पीसी नवानी ने रिस्ट्रक्चरिंग के कार्य को राजनीतिक दबाव में किया जा रहा कार्य करार दिया था। साथ ही आपदा की दृष्टि से केदार घाटी को असुरक्षित बताया था।
चार घंटे बाधित रहा केदारनाथ हाईवे
कुंड-गुप्तकाशी के बीच सेमी में ट्राला पलटने से केदारनाथ हाईवे चार घंटे बाधित रहा। बाद में ट्राला को किनारे कर यहां पर छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू करवाई गई।
जानकारी के अनुसार बुधवार अपराह्न 12.30 बजे केदारनाथ एनएच पर बाराही मंदिर सेमी के समीप एक ट्राला पलट गया। जिससे मार्ग अवरुद्ध हो गया। काफी मशक्कत के बाद शाम 4.30 बजे ट्राले को किनारे कर छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू करवाई गई।
निम ने ऑफ सीजन में भी उपलब्ध कराया रोजगार
केदारनाथ आपदा से टूट चुके केदारघाटी के लोगों के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उम्मीद की किरन बनकर आया है। निम की ओर से स्थानीय मजदूरों को ऑफ सीजन में भी रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
इससे स्थानीय लोगों के चेहरों से चिंता की लकीरें धीरे-धीरे कम हो रही हैं। वर्तमान में केदारघाटी के विभिन्न गांवों के करीब चार सौ ग्रामीण निम के साथ जुड़कर रोजगार कर रहे हैं।
वर्ष 2013 में जून में आई आपदा के बाद केदारनाथ यात्रा पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। आपदा का असर इस वर्ष भी यात्रा पर दिखाई दिया। यात्रियों के बहुत कम संख्या में आने से परिवार को पालने की चिंता सताने लगी थी।
ऐसे में केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण में जुटी निम ने लोगों की मदद की। निम ने त्रियुगीनारायण, सीतापुर, रामपुर, गौरीकुंड, बडासू, शेरसी, मनसूना, त्यूड़ी सहित कई गांवों के घोड़ा-खच्चर मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया है।
निम ने दिया जीने का सहारा
ये घोड़ा-खच्चर मजदूर सोनप्रयाग से निम की निर्माण सामग्री केदारनाथ ले जा रहे हैं। विजय सिंह रावत, मोहन सिंह, रंजीत ने बताया कि निम ने उन्हें जीने का सहारा दिया है।
यात्रा ठप होने से उनके सम्मुख आजीविका का संकट हो गया था। निम ने ऑफ सीजन के दौरान भी रोजगार मुहैया कराकर उनकी मदद की है। आज वे यात्रा सीजन से भी अधिक आमदनी कर रहे हैं।
निम के मनोज सेमवाल ने बताया कि निम को केदारनाथ धाम तक पुनर्निर्माण कार्य के लिए सामग्री पहुंचाने के लिए मजदूरों की जरूरत थी। ऐसे में घोड़ा-खच्चर मजदूरों की मदद ली गई।
बताया कि एक मजदूर को प्रति घोड़ा/खच्चर दो हजार रुपए दिया जाता है। एक महीने में एक मजदूर को औसतन बीस दिन का रोजगार प्राप्त हो जाता है।