वैज्ञानिकों की मानें तो व्हेल की इन प्रजातियों के जीवाश्म न सिर्फ राजस्थान के जैसलमेर व अन्य मरुस्थलीय इलाकों में पाए गए हैं। वरन, गुजरात के कच्छ और पाकिस्तान में भी इन व्हेल और सार्क के अवशेष पाए गए हैं। कुछ और राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में पाए जाने वाली व्हेल और शार्क मछलियों के अवशेष एक ही कालखंड के हैं।
जैसलमेर के मरुस्थलीय इलाके में व्हेल मछलियों के जीवाश्म पाए जाने से इस बात की पुष्टि होती है कि कभी यहां न सिर्फ समुद्र लहराता था, वरन समुद्री जीवों की हजारों प्रजातियां भी थीं। जीवाश्म का वैज्ञानिक अध्ययन करने से पता चलता है कि चार करोड़ साल पहले राजस्थान में समुद्र लहराता था जो बाद में भूगर्भीय हलचल और समय के साथ रेगिस्तान में तब्दील हो गया। फिलहाल इस संबंध में और अध्ययन किए जा रहे हैं।
- प्रो. (डॉ.) सुनील बाजपेई, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष भूविज्ञान विभाग, आईआईटी रुड़की