माय सिटी रिपोर्टर देहरादून कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन की वजह से गंगा, यमुना समेत देश की प्रमुख नदियों की सेहत में आए सुधार का अध्ययन होगा। देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों की टीम लॉक डाउन समाप्त होने के बाद गंगा और यमुना समेत देश की प्रमुख नदियों में जल की गुणवत्ता के साथ ही तमाम वैज्ञानिक पहलुओं की बारीकी से जांच करेंगे । संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरीके से कोरोना वायरस के चलते देश दुनिया में पिछले एक माह से लाकडाउन लागू है और तमाम गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं ऐसे में पर्यावरण पर सीधा असर पड़ने के साथ ही नदियों की सेहत पर भी इसका असर पड़ा है। वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ कलाचंद साईं ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते लागू लॉक डाउन की वजह से पर्यावरण प्रदूषण के साथ ही नदियों पर इसका खासा असर पड़ा है ।गंगा यमुना समेत तमाम प्रमुख नदियों में प्रदूषण का स्तर काफी हद तक ठीक हो चुका है ।नईदिल्ली में यमुना नदी में प्रदूषण की स्थिति बहुत अच्छी बताई जा रही है। लेकिन इन तमाम पहलुओं को लेकर वैज्ञानिक शोध किए जाने की जरूरत है। संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम लॉक डाउन से पहले, लाकडाउन के दौरान और लाकडाउन के बाद गंगा और यमुना समेत तमाम नदियों की मे जल की गुणवत्ता समेत अन्य चीजों में आए बदलाव का अध्ययन करेंगे ।फिलहाल वैज्ञानिकों के पास नदियों के पहले की स्थिति के बारे में ही वैज्ञानिक डाटा उपलब्ध है। लाकडाउन की वजह से वैज्ञानिकों की टीम शोध करने नहीं जा पा रही है ।लेकिन जैसे ही लाकडाउन में ढील दी जाएगी तो वैज्ञानिकों की टीम गंगा यमुना समेत अन्य नदियों की सेहत में आए बदलाव का अध्ययन करेगी । बता दें कि वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों की टीम लॉक डाउन के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ ही ग्लेशियर पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन कर रही है इसके अलावा वैज्ञानिकों की टीम इस बात का भी पता लगा रही है कि क्या कोरोना वायरस के पूर्वज आज के लाखों साल पहले भी पाए गए थे ।इसके लिए जीवाश्म विज्ञानियों की टीम पैलियो वायरोलॉजी तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।