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वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, आपदा आई तो कैलाश मानसरोवर का यह हिस्सा हो सकता है तबाह!

Fri, 08 Sep 2017 07:04 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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वैज्ञान‌िकों ने कैलाश मानसरोवर को लेकर एक खुलासा क‌िया है। उनका मानना है क‌ि कैलाश मानसरोवर का कुछ ह‌िस्सा आपदा के लिहाज से अति संवेदनशील है। ऐसे में अगर आपदा आती तो है इस ह‌िस्से को सबसे ज्यादा खतरा हो सकता है। 
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यह खुलासा भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से कराई गई सेटेलाइट मैपिंग में हुआ है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से होकर जाने वाले कैलाश मानसरोवर मार्ग का 216 वर्ग किलोमीटर हिस्सा आपदा के लिहाज से अति संवेदनशील है। 

सैटेलाइट मैप‌िंग में सच आया सामने

यह बातें वैज्ञान‌िकों ने हाल ही में हुई संगोष्ठी पर संगोष्ठी में साझा किया गया। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक व डीन (वाइल्डलाइफ साइंसेज) डॉ. जीएस रावत का कहना है क‌ि भारतीय क्षेत्र में कैलाश पवित्र भूक्षेत्र 7121 वर्ग किलोमीटर में फैला है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय यात्री उच्च हिमालयी क्षेत्र का दुर्गम सफर तय कर कैलाश मानसरोवर पहुंचते हैं। 

यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की ज‌िम्मेदारी है। ऐसे में यह अध्ययन इस भारी तबाही से बचा सकता है। उन्होंने बताया क‌ि वर्ष 2013 में शोधार्थी एजाज हुसैन ने यात्रा मार्ग के सात हजार 212 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र की मैपिंग शुरू की थी।
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इस ल‌िहाज से है संवेदनशील

अब यह मैप‌िंग का पूरा हो गया है। एक दैन‌िक समाचार पत्र में छपी खबर के मुताब‌िक, मैप‌िंग में सामने आया है क‌ि 174 वर्ग किलोमीटर भाग वनाग्नि के लिहाज से अति संवेदनशील है। साथ ही 72 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल बाढ़ व भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में वन्यजीवों से खतरे का भी आकलन किया गया। वहीं 195 स्थलों पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की सर्वाधिक आशंका हैं। 

 डॉ. जीएस रावत का कहना है क‌ि सरकार के ल‌िए यह शोध बहुत बड़ी राहत है। इसल‌िए अध्ययन को केंद्र सरकार, राज्य सरकार व आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के साथ साझा किया जाएगा। ताकि संवेदनशीलता के हिसाब व सुरक्षा प्रबंधन व बचाव के कार्य किए जा सकें। 
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