फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वैज्ञानिक तलाश रहे हिमालय में 'खोया' हुआ 'संसार'

Mon, 03 Oct 2016 11:36 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
himalaya
विज्ञापन
हिमालय के गर्भ में समुद्र के साथ समाए जलीय जंतुओं के संसार की खोजबीन में सारी दुनिया के विज्ञानी जुट गए हैं। हिमालयी क्षेत्र में आ रहे तेजी से बदलाव को समझने के लिए विज्ञानी बीते दिनों के रहस्यों से पर्दा उठाना चाहते हैं, जिससे आने वाले दिनों के संबंध में कुछ अंदाज लग सके। हिमालयी ‘सब डक्शन जोन’ में जीव-जंतुओं के जीवाश्म को तलाशा जा रहा है।
विज्ञापन


जांच कर पता लगाया जा रहा है कि जब समुद्र भूगर्भ में समाया था तो स्थिति क्या रही होगी? समुद्र के जलीय संसार में किन जीवों का दबादबा रहा और उस वक्त ऑक्सीजन का लेवल क्या था? वैसे तो इस वक्त अमेरिकी, जर्मनी, इतालवी, फ्रांसिसी आदि देशों के विज्ञानियों ने हिमालयी ‘सब डक्शन जोन’ में डेरा डाल रखा है।

हर देश का विज्ञानी गोपनीय तरीके से यहां शोध कर रहा है। करोड़ों साल पुराने जीवाश्मों के जो साक्ष्य मिल रहे हैं उनकी जांच अपने अंदाज से की जा रही है। भारतीय विज्ञानियों ने इसका नाम ‘लॉस्ट सिटी’ दिया है। ‘लॉस्ट सिटी’ में वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. वरुण कुमार मुखर्जी समेत अन्य विज्ञानी जुटे हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमालय
बताया जाता है कि तकरीबन पांच करोड़ साल पहले जब इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसनी शुरू हुई तो जगह पाकर यहां समुद्र भूगर्भ में समा गया।

इसके साथ ही यहां का समृद्ध समुद्री जलीय संसार भी खत्म हो गया। यहां जो जलीय जंतु रहे हैं उनके जीवाश्म प्रकृति ने इस क्षेत्र में सुरक्षित रखे हुए हैं। विज्ञानियों का मानना है कि इनकी जांच से पहले जलवायु परिवर्तन के संबंध में पता चलेगा। इस दौरान यहां ज्वालामुखी बड़ी संख्या में फटे हैं।

जीवाश्म के रूप में जो साक्ष्य मिले हैं उनसे माना जा रहा है कि ज्वालामुखी के प्रभाव के कारण यहां का पानी अलकेलाइन हो गया। पानी में एसिड की मात्रा बढ़ गई होगी, जिससे ऑक्सीजन लेवल नीचे आया और जंतुओं को जी पाना मुश्किल हो गया। इससे पुरातन काल के पर्यावरण और चट्टानों के प्रकार के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

‘लॉस्ट सिटी’ के संबंध में जानकारी जुटाने के लिए विदेशी विज्ञानी भी गोपनीय तरीके से काम कर रहे हैं। यहां मिलने वाले साक्ष्यों से उस वक्त के जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और जलीय संसार की विविधता के संबंध में भी जानकारी मिलेगी, जो साक्ष्य मिल रहे हैं उनकी जांच की जा रही है।
- डॉ. वरुण कुमार मुखर्जी, वरिष्ठ विज्ञानी, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें