गुरुवार देर शाम को कोटद्वार क्षेत्र में दोपहर बाद धुमाकोट और नैनीडांडा क्षेत्र में आंधी तूफान के साथ बारिश हुई। इस बीच तेज हवाओं से जडाऊखांद में एक पेड़ टूटकर दुकान के ऊपर जा गिरा, गनीमत यह रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। बारिश से क्षेत्र का मौसम सुुहाना हो गया। आंधी के चलते क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति बाधित हो गई है। कोटद्वार में भी आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुककर तेज हवाएं चलती रहीं।
क्षेत्र में गत दो दिनों से उमस भरी गर्मी पड़ रही थी। बृहस्पतिवार को सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ था, लेकिन फिर धूप खिलने से लोग चिलचिलाती गर्मी से परेशान रहे। दोपहर बाद एक बार फिर मौसम का मिजाज बदला शाम को करीब चार बजे आंधी तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई। करीब एक घंटे तक बारिश जारी रही। इससे क्षेत्र में पारा लुढ़क गया और लोगों को गर्मी से निजात मिल गई। तेज हवाओं के चलते जडाऊखांद में एक पेड़ टूटकर दुकान के ऊपर जा गिरा, जिससे दुकान की छत को नुकसान पहुंचा है।
राज्य के पहाड़ी इलाकों में अगले 12 घंटों के दौरान तेज ओलावृष्टि और बिजली गिरने की आशंका है। वहीं, मैदानी इलाकों में तेज रफ्तार आंधी चल सकती है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में 13 जून तक हल्की बारिश हो सकती है।
मौसम केंद्र की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार प्रदेश के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ के कुछ हिस्सों में अगले 12 घंटों के दौरान ओले गिर सकते हैैं। इसके अलावा कुछ इलाकों में बिजली गिरने की आशंका भी है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है।
दूसरी ओर, प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले हल्की बारिश के कुछ दौर हो सकते हैं। सात से दस जून तक उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ इलाकों में हल्की बारिश के आसार हैं। वहीं, 11 से 13 के बीच बारिश की मात्रा में बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि आठ जून के बाद अधिकतम तापमान में कमी आ सकती है।
सुबह से ही तीर्थनगरी में कभी बादल तो कभी धूप की आंख मिचौली चलती रही। दोपहर करीब ढाई बजे के बाद अचानक मौसम ने रंग बदल दिया। झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस दौरान कहीं-कहीं पर ओले भी गिरे।
देश विदेश से पहुंचे पर्यटक भी बारिश को देख सड़कों पर निकल आए। बारिश करीब एक घंटे तक चली। इसके बाद हल्की धूप खिली। लेकिन, शाम होते होते मौसम ने फिर करवट बदल ली। ठंडी हवाएं चलने लगी थीं। रात तक मौसम का यह मिजाज कायम था।