सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों में काम करने वाले स्टाफ की नशाखोरी के संबंध में सत्यापन कराया जाएगा। स्कूल के अंदर बराबर तलाशी ली जाएगी कि किसी ने नशीला पदार्थ छिपाकर तो नहीं रखा है। इसके साथ ही स्कूलों के आसपास नशीले पदार्थ बेचने वालों पर निगाह रखी जाएगी। इस संबंध में अपर सचिव एवं महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की ओर से शनिवार को शासनादेश जारी कर दिया गया।
अपर सचिव की ओर से जारी इस शासनादेश में बेसिक और माध्यमिक के अपर निदेशकों, सभी मुख्य शिक्षाधिकारियों को स्कूलों में नशाखोरी के खिलाफ अभियान चलाने के लिए कहा गया है। अगर कोई छात्र नशे का लती पाया जाता है तो उसका परीक्षण नशा मुक्ति केंद्र में कराने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही शासनादेश में निदेशक एससीईआरटी से कहा गया है कि पाठ्यक्रम में नशे पर एक अध्याय शामिल किया जाए जिससे बच्चे नशे से होने वाले नुकसान को जान सकें और इससे बचें। इसके साथ बच्चों को जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, गढ़वाल और कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत के प्रति भी जागरुक करने के लिए शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए गए।