70 मानकों पर परखी गई स्कूली शिक्षा
पीजीआई की यह रिपोर्ट 70 मानकों और पांच डोमेन वाली दो प्रमुख श्रेणियों के आधार पर तैयार की गई है। इसके लिए आंकड़े कई स्रोतों से इकट्ठा किए गए हैं। इस रिपोर्ट में 70 मानकों में कुल 1000 अंक शामिल हैं, जिन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों को आगे पांच डोमेन में विभाजित किया गया है। इनमें डोमेन-एक में लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी के लिए नौ मानकों में 180 अंक, डोमेन-2 में एक्सस के आठ मानकों में 80 अंक, डोमेन-3 में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के लिए 11 मानकों में 150 अंक, डोमेन-4 में इक्विटी के लिए 16 मानकों में 230 अंक। कुल 640 अंक रखे गए हैं। इसके अलावा दूसरी श्रेणी सुशासन और प्रबंधन में 26 मानकों में 360 अंकों को शामिल किया गया है। इसी श्रेणी में उत्तराखंड को सबसे कम अंक मिले हैं।
पीजीआई में बीते चार वर्षों में उत्तराखंड का प्रदर्शन
2017-18 18-19 19-20 20-21
704 712 752 719
शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने इंटनेट के सिर फोड़ा ठीकरा
पीजीआई रिपोर्ट में उत्तराखंड के खराब प्रदर्शन पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इसका ठीकरा इंटरनेट के सिर फोड़ा है। उनके अनुसार प्रदेश में स्कूली शिक्षा में सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में इंटरनेट की अनुपलब्धता के चलते पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पाई हैं। डॉ. रावत ने कहा कि सुशासन और प्रबंधन (गर्वनेंस एंड मैनेजमेंट) के मामले में इस रिपोर्ट में उत्तराखंड ने बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है। इसकी वजह पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत सी जगह इंटरनेट की पहुंच का न होना है। केंद्र सरकार का शिक्षा मंत्रालय सारा डाटा यू-डायस पोटर्ल से उठाता है। इस पोटर्ल पर सारी डिटेल स्कूल भरते हैं, जिसमें बच्चों की परफॉरमेंस से लेकर स्कूल में मौजूद बिजली-पानी और अन्य सुविधाओं की जानकारी भरनी होती है। इंटरनेट की कमी के चलते बहुत से स्कूल इन तमाम जानकारियों को नहीं भर पाए हैं। शिक्षा विभाग विद्या समीक्षा केंद्र ऑनलाइन पोर्टल तैयार कर रहा है, जिसमें रियल टाइम डाटा भरा जाएगा, अगले छह माह में सारी जानकारियां इसमें भर दी जाएंगी।
उत्तराखंड नौ नवंबर को 23वें राज्य स्थापना दिवस की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हमें आत्म-आलोचनात्मक और ईमानदारी से यह पूछना चाहिए की विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन के मामले में हम कहां खड़े हैं। स्कूली शिक्षा का गिरता स्तर शासन की कमी और सिस्टम के उदासीन रवैये का परिणाम है। उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा के पेशे में जुड़े सभी हितधारकों को इन खराब परिणामों पर गहराई से विचार करने और स्थिति को बेहतर बनाने के लिए बदलाव करने के बारे में सोचना चाहिए।
- अनूप नौटियाल, अध्यक्ष एसडीसी फाउंडेशन