उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल की सोमवार को जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। न्यायालय ने इसकी भूमिका को इस आर्थिक अपराध में बेहद अहम मानते हुए जमानत नामंजूर की।
गीताराम नौटियाल काफी दिनों की लुकाछुपी के बाद बृहस्पतिवार को सिडकुल थाने (हरिद्वार) में पहुंचे थे। उसके बाद एसआईटी ने उन्हें गिरफ्तार किया और शुक्रवार को विजिलेंस कोर्ट देहरादून में पेश किया गया।
जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। शुक्रवार को ही उन्होंने जमानत की अर्जी भी लगाई थी, लेकिन उस पर तैयारी के लिए अभियोजन ने समय मांगा। शासकीय अधिवक्ता राजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि सोमवार को गीताराम नौटियाल की जमानत अर्जी पर बहस हुई थी।
इस दौरान अभियोजन बचाव पक्ष के सारे तर्कों को निराधार साबित करने में कामयाब रहा। न्यायालय ने भी माना कि यह गंभीर प्रकृति का आर्थिक अपराध है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का हक मारा गया। ऐसे में इस तरह के आरोप में किसी भी आरोपी को जमानत मिलना न्यायसंगत नहीं होगा। लिहाजा, नौटियाल को जमानत नहीं दी गई।