रुड़की में भी एसआईटी ने दो कॉलेज संचालकों के खिलाफ छात्रवृत्ति घोटाले में केस दर्ज करवाए हैं। केस दर्ज होने के बाद कॉलेज संचालक भूमिगत हो गए हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापा मारने की तैयारी कर रही है।
करोड़ों का छात्रवृत्ति घोटाला उजागर होने के बाद एसआईटी लगातार कॉलेज संचालकों के खिलाफ शिकंजा कस रही है। एसआईटी जांच में लगातार कॉलेजों में छात्रवृत्ति घोटाले का मामला सामने आ रहा है। एसआईटी ने अब रुड़की के कॉलेजों में लाखों की छात्रवृत्ति घोटाले का मामला पकड़ा है।
एसआईटी टीम में शामिल एसआई शैलेंद्र ममगाईं ने सिविल लाइंस कोतवाली में भारतीय महाविद्यालय आशदीप कांपलेक्स, सिविल लाइन रुड़की के खिलाफ तहरीर देकर बताया कि कॉलेज में अनुसूचित जाति के छात्रों का फर्जी प्रवेश दर्शाते हुए 38 लाख, 26 हजार 460 रुपये छात्रवृत्ति का गबन किया है। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि कॉलेज संचालक के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
वहीं, गंगनहर कोतवाली में एसआईटी टीम में शामिल एसआई खजान सिंह ने बाबूराम डिग्री कॉलेज, बाबूराम डिग्री कॉलेज आईआईटी और बाबूराम डिग्री कॉलेज प्राइवेट आईटीआई सालियर के संचालक के खिलाफ तहरीर दी है। इसमें बताया कि अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों का फर्जी प्रवेश दर्शाकर समाज कल्याण विभाग से 46 लाख, 24 हजार 380 रुपये का गबन किया गया है। गंगनहर कोतवाली प्रभारी राजेश साह ने बताया कि केस दर्ज कर संचालक के गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
छात्रवृत्ति घोटाले में खानपुर क्षेत्र के दो शिक्षण संस्थाओं में करीब पांच करोड़ के गबन का मामला सामने आया है। एसआईटी ने दोनों संस्थाओं के खिलाफ खानपुर थाने में मुकदमे दर्ज कराए हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
एसआईटी उपनिरीक्षक भानु सिंह की ओर से दी गई तहरीर में बताया गया कि प्रह्लादपुर स्थित कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी प्रबंधन ने वर्ष 2014-15, 2016-17 में छात्रों के फर्जी प्रवेश दिखाकर 52 लाख 88 हजार 500 रुपये गबन कर लिया। वहीं, एसआईटी निरीक्षक कमल कुमार लुंठी ने तहरीर दी कि प्रह्लादपुर स्थित आरबीएस स्कूल के संचालकों ने वर्ष 2015-16 और 2016-17 में छात्रों के फर्जी प्रवेश दिखाकर छात्रवृत्ति के नाम पर चार करोड़ 43 लाख 52 हजार 200 रुपये का गबन किया है।
खानपुर एसओ दिलमोहन सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं, आरबीएस के संचालक का कहना है कि उनसे इस बाबत एसआईटी की ओर से पहले कोई पूछताछ या दस्तावेज नही मांगे गए। साथ ही उन्हें इस बाबत नोटिस भी नहीं दिया गया है।