समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच का मामला बेशक खटाई में हो, मगर इस बहुचर्चित घपले से जुड़े नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं।
नया मामला अनुसूचित जाति वर्ग की छात्रवृत्ति का है, जो सहारनपुर की एक निजी यूनिवर्सिटी को जारी हुई। संस्थान ने नाटकीय ढंग से छात्रवृत्ति की 69 लाख 73 हजार 100 रुपये की राशि देहरादून के जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यू) को यह कहकर लौटा दी कि विभाग ने लाभार्थी छात्रों की सूची नहीं भेजी।
करीब 19 महीने तक लाखों की छात्रवृत्ति संस्थान के बैंक खाते में पड़ी रही। समाज कल्याण अधिकारी ने भी बगैर सवाल-जवाब के यह राशि राजकोष जमा करा दी। मगर इस प्रकरण में कई वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
‘अमर उजाला’ के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक, देहरादून के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी ने 28 अगस्त, 2015 को सहारनपुर (गंगोह) की एक यूनिवर्सिटी को प्रदेश के 127 अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के नाम पर 69 लाख 73 हजार 100 रुपये की छात्रवृत्ति भेजी।