छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने वालों ने अपने आरोपों के समर्थन में तथ्यपरक साक्ष्य भी जुटाए हैं। एसआईटी को इन्हीं साक्ष्याें के साथ शिकायत की गई है। देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में चल रहे व्यावसायिक संस्थानों में कुछ छात्रों का एक ही शैक्षणिक वर्ष में अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला दर्शाकर छात्रवृत्ति ठिकाने लगाई है।
उदाहरण के तौर पर यदि एक छात्र ने एक कालेज में बीबीए में प्रवेश लिया है तो उसी वर्ष में दूसरे कालेज में उसका बीए में एडमिशन है। ऐसे कई छात्र हैं, जिनके एक वर्ष में दो और तीन पाठ्यक्रमों में प्रवेश दर्शाकर छात्रवृत्ति ली गई है। इन छात्राें के प्रवेश में पिता का नाम तो एक समान ही दर्शाया गया है, लेकिन मोबाइल नंबर अलग है। कुछ मामलों में पता भी दूसरा दर्शाया गया है।
अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती ने बताया कि उन्होंने एसआईटी को प्राइवेट कालेजाें में एक ही छात्र के नाम दो से तीन बार छात्रवृत्ति वसूलने की शिकायत की है। समाज कल्याण विभाग के आईटी सेल की लापरवाही की वजह से यह सब खेल हुआ है। 2014 में छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन में बार कोड व्यवस्था लागू करने का शासनादेश जारी किया गया था, लेकिन बार कोड न होने की वजह से एक शैक्षणिक वर्ष में दो से तीन कालेज में एडमीशन दर्शाने का खेल पकड़ में नहीं आ सका। यदि प्रत्येक आवेदन पर बार कोड होता तो यह स्थिति नहीं बनती।
नैनीताल हाईकोर्ट ने समाज कल्याण विभाग से कम आय का प्रमाण पत्र दर्शाकर छात्रवृत्ति हड़पने के मामले में नामजद मयंक नौटियाल की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता चंद्रशेखर करगेती और सरकार को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
न्यायमूर्ति एनएस धानिक की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। एसआईटी जांच के बाद अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती ने कम आय का प्रमाण पत्र दर्शाकर छात्रवृत्ति वसूलने के मामले में मयंक नौटियाल, उसके पिता मुन्ना लाल नौटियाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी, तहसीलदार, लेखपाल और नोडल अधिकारी आईटी सैल के खिलाफ 11 जनवरी को डोईवाला कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि 2013-14 में मयंक नौटियाल के हिमालयन आयुर्वेदिक कॉलेज देहरादून में एमबीबीएस में प्रवेश के दौरान कम आय का प्रमाण पत्र जमा कराया गया था।
आरोप है कि तहसील कर्मचारियाें से सांठगांठ कर कम आय का प्रमाण पत्र जारी कराया था। नियमानुसार पात्र न होते हुए भी समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत लाखों रुपए की छात्रवृत्ति ली थी। मयंक नौटियाल की ओर से यह कहते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी कि सिर्फ लिखित शिकायत पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मयंक आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती ने बताया कि हाईकोर्ट ने मयंक नौटियाल की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। 18 फरवरी से पहले वह हाईकोर्ट में इस मामले में जवाब दाखिल करेंगे।
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच की मांग को लेकर नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान ने समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य पर जांच करवाने में ढिलाई का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री होने के नाते आर्य छात्रवृत्ति घोटाले में जरा भी सख्ती दिखाते तो कई आरोपी कानून के शिकंजे में होते। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंत्री पर किसी सिंडीकेट का दबाव था या फिर वे फैसला लेने में सक्षम नहीं थे ?
षणमुगम की जांच पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?
याचिकाकर्ता जुगरान ने कहा कि 2017 में तत्कालीन अपर सचिव डॉ. वी. षणमुगम ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी तो यशपाल आर्य मंत्री थे। उन्होंने रिपोर्ट का संज्ञान क्यों नहीं लिया? संज्ञान लिया गया होता तो अब तक सब सलाखों के पीछे होते? आखिर उनकी उदासीनता क्या समझा जाए? इसे उनका संरक्षण समझें या लीपापोती।
आखिर क्यों बदल दी गई एसआईटी ?
जुगरान ने कहा कि हम मंत्री पर कैसे विश्वास करें, जो लोग छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को आगे बढ़ा रहे थे, उन्हें एक-एक करके हटा दिया गया। मुख्यमंत्री के आदेश पर एसआईटी गठन में महीनों लग गए। मंत्री जी बताएंगे कि कोर्ट में मामला जाने के बाद भी एसआईटी कैसे बदल दी? क्या इस मामले में विभागीय मंत्री की राय ली गई ? एसआईटी बदलने के बाद चार लोगों के विरुद्ध मुकदमा कायम हो जाता है? क्या मंत्री को पता नहीं है कि उनके मंत्रालय में क्या हो रहा है?
समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य कहते हैं कि ‘मैंने पहले दिन से ही छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को लेकर सख्ती दिखाई। शुरुआती बैठकों में अधिकारियों को कई निर्देश दिए। अपनी पहली और दूसरी बैठक में यदि मैं सख्त नहीं होता तो शायद ये मामला इतना आगे नहीं बढ़ पाता। एसआईटी को अब सफलता मिल रही है।
संलिप्तता मिली तो कार्रवाई होगी
छात्रवृत्ति घोटाले में समाज कल्याण विभाग आईटी प्रकोष्ठ के तत्कालीन नोडल अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के सवाल पर आर्य ने कहा कि अभी इस मामले में उनकी संलिप्तता का पता लगाना आवश्यक है। यदि विभाग के किसी भी अधिकारी की घोटाले में संलिप्तता पाई जाएगी तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
जांच में सहयोग नहीं किया तो कार्रवाई होगी
एसआईटी जांच में विभागीय अधिकारियों के सहयोग न किए जाने के सवाल पर समाज कल्याण मंत्री का कहना है कि वे चाहते हैं कि जांच में तेजी आए। एसआईटी उन लोगों का पर्दाफाश करे जो घोटाले में लिप्त हैं। मैंने आदेश दे दिए हैं कि जो जांच में सहयोग नहीं कर रहा है, उसे चिन्हित किया जाए और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।