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परिजन सरकारी दफतरों में कर रहे काम, बच्चे डकार गए हजारों की छात्रवृत्ति, पढ़ें हैरतअंगेज रिपोर्ट 

Sun, 03 Feb 2019 10:06 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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बीबीए का एक छात्र। पिता सहकारी बैंक के प्रबंधक। वेतन 73 हजार रुपये से ज्यादा। बावजूद उसे छात्रवृत्ति की जरूरत पड़ गई। साठगांठ करके आमदनी कम दिखाई और बीबीए की पढ़ाई में 58200 रुपये की छात्रवृत्ति पाने में कामयाब रहा। यह एक उदाहरण मात्र है, उन अमीर परिवारों का जिन्होंने सरकारी मदद के लिए खुद को गरीब दर्शाया। ऐसे मामले एसआईटी की जांच में शामिल किए गए हैं। 

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जौनसार बावर क्षेत्र के सरकारी ठेकेदार ने तो हद ही कर दी। ए श्रेणी के इस ठेकेदार की मासिक आय तो लाखों में है। हैसियत थी तभी तो ए श्रेणी का लाइसेंस बना। बावजूद इसके बेटी को पढ़ाने में खुद को असमर्थ दिखाया और केवल 8300 रुपये के लिए खुद को गरीबों की श्रेणी में दर्शा दिया। इस तरह के कई मामले हैं। 

एक आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से मांगी गई सूचना में यह खुलासा हुआ है। करोड़ोें रुपये के इस घोटाले में यूं तो 338 छात्र बताए जा रहे हैं, मगर 50 से ज्यादा छात्र ऐसे हैं जिनके माता-पिता सरकारी सेवाओं में हैं या उनका अच्छा कारोबार है। इनमें केंद्र सरकार के कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्होंने बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकारी धन डकारा है। छात्रों और उनके परिजनों का यह चिट्ठा भी अब एसआईटी जांच में शामिल हो गया है। 

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ये हैं कुछ और मामले 

सरकारी ठेकेदार के बेटे को मिली 90 हजार की छात्रवृत्ति  
रुड़की के एक विवि में बीई की पढ़ाई करने वाले छात्र के पिता भी लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के ठेके  लेते हैं। आरटीआई के तहत मिली जानकारी में उनकी मासिक आय 60 हजार रुपये प्रतिमाह है, लेकिन बेटे को इंजीनियरिंग कराने के लिए 90 हजार रुपये वर्ष 2015-16 के सत्र के दौरान सरकार से लेने पड़े। 

आईटीबीपी कर्मी की बेटी ने पाए 45300 रुपये 
हरिद्वार जनपद के ही एक शख्स भारत तिब्बत सीमा बल में कार्यरत हैं। मासिक आय 60 हजार रुपये यानी 7.20 लाख रुपये सालाना, लेकिन सत्र 2015-16 में बेटी को बीसीए के प्रथम वर्ष की पढ़ाई कराने के लिए 45300 सरकार से लेने पड़ गए। जाहिर है आय दिखाने में कोई न कोई झोल तो जरूर किया होगा। 

सरकारी अध्यापक का बेटा पा गया 55500 रुपये 
जौनसार बावर क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं। उनके और भी कई कारोबार हैं। सरकारी दस्तावेजों में मासिक आय 216000 रुपये है। बेटे को सत्र 2015-16 में दून के एक बड़े शिक्षण संस्थान में दाखिला दिलाया। बीई की पढ़ाई के लिए आय में झोल करके सरकार से 55500 रुपये छात्रवृत्ति हासिल कर ली। 
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